गर्भावस्था के दौरान शरीर में होते है कई बदलाव: भोजन में लापरवाही करने से हो सकती है कमजोरी, सितंबर में मानाया जाता है राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

निवेदिता चंद|
भोजन में लापरवाही करने से हो सकती है कमजोरी, सितंबर में मानाया जाता है राष्ट्रीय पोषण सप्ताह

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के मौके पर गर्भवती महिलाओं के खान-पान को लेकर जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं और इस समय सही खान-पान मां और गर्भ में पल रहे बच्चे, दोनों की सेहत के लिए अहम भूमिका निभाता है। इस दौरान भोजन में लापरवाही कमजोरी और पोषण की कमी का कारण बन सकती है। वहीं, संतुलित और पौष्टिक आहार गर्भावस्था को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है। इसलिए गर्भवती महिलाओं को अपनी रोजाना की थाली को लेकर खास सावधानी बरतनी चाहिए।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह भारत में हर साल एक सितंबर से सात सितंबर तक मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य, संतुलित आहार और पोषण के महत्व के प्रति जागरूक करना है। यह सप्ताह लोगों को कुपोषण, एनीमिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी स्वास्थ्य चुनौतियों से लड़ने के लिए प्रेरित करता है। भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले खाद्य एवं पोषण बोर्ड द्वारा 1982 में इसकी शुरूआत की गई थी। तब से देश में हर साल सितंबर के पहले सप्ताह में इसे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य में सुधार लाना है। समाज को जंक फूड के दुष्प्रभावों से बचाना और दैनिक आहार में पोषक तत्वों की मात्रा को सुनिश्चित करना इसका अहम हिस्सा है।

हरी सब्जियां, दाल और दूध की आवश्यकता

गर्भ धारण करने से पहले और बाद में हमें अपने शरीर में पर्याप्त प्रोटीन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। पालक, मेथी, सरसों का साग जैसी हरी सब्जियां कई जरूरी पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। इन्हें भोजन में नियमित रूप से शामिल किया जा सकता है। साथ ही मूंग, मसूर, अरहर, चना, राजमा और छोले जैसे खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अच्छे स्रोत हैं। गर्भावस्था में पर्याप्त प्रोटीन शरीर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है। वहीं कैल्शियम और प्रोटीन के लिए दूध, दही और अन्य डेयरी उत्पाद उपयोगी हो सकते हैं। कैल्शियम बच्चे की हड्डियों और दांतों के विकास के लिए महत्वपूर्ण होता है।

मौसमी फल और साबुत अनाज फाइबर के अच्छे स्त्रोत

सेब, केला, संतरा, अमरूद, पपीता आदि फलों को डॉक्टर की सलाह और व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार डाइट में शामिल किया जा सकता है। फल विटामिन, मिनरल और फाइबर प्रदान करते हैं। इसके साथ ही दलिया, ओट्स, गेहूं, बाजरा, ज्वार और अन्य साबुत अनाज ऊर्जा और फाइबर के अच्छे स्रोत हो सकते हैं।

डाइट में शामिल करे मेवे,बीज और प्रोटीन

गर्भावस्था के दौरान बादाम, अखरोट, मूंगफली, तिल और दूसरे बीज सीमित मात्रा में लिए जा सकते हैं। इनमें प्रोटीन, हेल्दी फैट और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। साथ ही अंडा, पनीर, सोया, दाल, दूध-दही और व्यक्ति की पसंद व स्वास्थ्य के अनुसार अन्य प्रोटीन स्रोत डाइट में शामिल किए जा सकते हैं।

जंक फूड के सेवन से बचें

गर्भावस्था के दौरान बहुत ज्यादा जंक फूड, अत्यधिक मीठे और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करना बेहतर है।शराब और तंबाकू से पूरी तरह बचना चाहिए। कच्चे या अधपके खाद्य पदार्थों को लेकर भी सावधानी बरतना जरूरी है। गर्भावस्था में हर महिला की पोषण संबंधी जरूरत अलग हो सकती है। किसी भी सप्लीमेंट, दवा या विशेष डाइट को शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें

अधूरी नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।