शारीरिक और मानसिक थकावट बन सकता है डिप्रेशन का कारण: रोजमर्रा की जिंदगी पर डाल सकता है असर, इनके लक्षणों को ना करें नजरअंदाज

लगातार रहने वाली थकान केवल शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि डिप्रेशन का एक प्रमुख शारीरिक लक्षण हो सकती है। जब दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर का संतुलन बिगड़ता है, तो पर्याप्त आराम करने के बाद भी शरीर में ऊर्जा की भारी कमी महसूस होती है। इस स्थिति को क्लिनिकल भाषा में 'शारीरिक और मानसिक थकावट' कहा जाता है।
डिप्रेशन के कई लक्षणों को हम समान थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि आगे चलकर ये हमें काफी परेशान करते हैं। रोजमर्रा की भागदौड़ में थकान, चिड़चिड़ापन या नींद में बदलाव को हम नजरअंदाज करते रहते हैं। अगर ये बदलाव लगातार कई दिनों या हफ्तों तक बने रहें तो ये हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगते हैं।
लंबे समय तक उदास रहना
डिप्रेशन में व्यक्ति लंबे समय तक उदास, खाली या निराश महसूस कर सकता है। कई बार इसके पीछे कोई स्पष्ट कारण भी नजर नहीं आता। छोटी-छोटी बातों में खुशी महसूस न होना और भविष्य को लेकर नकारात्मक विचार बढ़ना भी इसका हिस्सा हो सकता है। अगर उदासी लगातार बनी रहे और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सामाजिक व्यवहार से दूरी बना लेना
डिप्रेशन का एक अहम संकेत यह है कि व्यक्ति उन कामों में भी दिलचस्पी खोने लगता है, जिन्हें वह पहले खुशी से करता था। दोस्तों से मिलना, घूमना, फिल्म देखना, खेलना या अपने पसंदीदा शौक में समय बिताना बोझ जैसा लग सकता है। धीरे-धीरे व्यक्ति सामाजिक गतिविधियों से भी दूरी बनाने लगता है।
लगातार थकान महसूस करना
पर्याप्त नींद या आराम के बावजूद लगातार थकान महसूस होना भी डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। व्यक्ति को सामान्य काम करने में भी काफी मेहनत महसूस हो सकती है। सुबह उठना, ऑफिस जाना, पढ़ाई करना या घर के जरूरी काम करना मुश्किल लग सकता है। यही कारण है कि कई लोग डिप्रेशन के शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान समझ लेते हैं।
वजन में अचानक बदलाव आना
डिप्रेशन का असर व्यक्ति की नींद और खाने की आदतों पर भी पड़ सकता है। कुछ लोगों को रात में नींद नहीं आती या बार-बार नींद टूटती है, जबकि कुछ लोग सामान्य से ज्यादा सोने लगते हैं। इसी तरह किसी की भूख काफी कम हो सकती है तो कोई ज्यादा खाने लगता है। इसके कारण वजन में भी अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।
दिमाग पर नकारात्मक विचारों का दबाव
डिप्रेशन के दौरान दिमाग पर नकारात्मक विचारों का दबाव इतना बढ़ सकता है कि व्यक्ति को किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने लगे। पढ़ाई या ऑफिस के काम में मन नहीं लगना, चीजें भूलना और छोटे-छोटे फैसले लेने में भी कठिनाई महसूस होना इसके संकेत हो सकते हैं। अगर ऐसी परेशानी लंबे समय तक बनी रहे और दैनिक जीवन प्रभावित हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।










