सही तरीके से करें तकिये का चुनाव: गलत आकार का तकिया बिगाड़ सकता है शरीर का संतुलन, नींद पर डाल सकता है असर

सोन से पहले तकिया लगाना आम बात है। बहुत कम लोग ऐसे होंगे जो सोते समय तकिये का यूज नहीं करते हैं। अपने-अपने घर में हमारा एक तकिया फिक्स होता है। जिसे अगर कोई और लगा ले तो लड़ाई-झगड़े तक होने लगते हैं। कुछ लोगों को अपने तकिये से इतना लगाव हो जाता है कि एक ही तकिये का वर्षों तक इस्तेमाल करते हैं। जो गर्दन दर्द, कंधों में जकड़न और नींद की खराब गुणवत्ता का कारण बन सकता है। अगर आपको तकिया लगाए बिना नींद नहीं आती या सुबह उठने के बाद गर्दन में दर्द महसूस होता है, तो अपने तकिए के चुनाव पर ध्यान देना जरूरी है।
न्यूरोलॉजिस्ट के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए तकिए का आकार, ऊंचाई और मजबूती अलग हो सकती है। सोने की पोजीशन, शरीर की बनावट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सही तकिये का चुनाव जरूरी है। बहुत मोटा या पतला तकिया लगाने से गर्दन से लेकर कमर तक का दर्द बढ़ सकता है। बहुत ऊंचा तकिया गर्दन को आगे झुकाता है, जिससे रीढ़ की हड्डी का प्राकृतिक आकार बिगड़ जाता है और मांसपेशियों में खिंचाव व अकड़न पैदा होती हैं।
गलत आकार के तकिय से बिगड़ सकता है पीठ और सिर का संतुलन
नींद के दौरान शरीर को आराम मिलने के लिए गर्दन, पीठ और सिर का सही संतुलन में रहना जरूरी होता है। गलत आकार, ऊंचाई या कठोरता वाला तकिया इस संतुलन को बिगाड़ सकता है। इसका असर सिर्फ नींद की गुणवत्ता पर नहीं, बल्कि सुबह उठने के बाद शरीर की परेशानी के रूप में भी दिखाई दे सकता है।
ऊंचे तकिये के इस्तेमाल से बचें
जरूरत से ज्यादा ऊंचे तकिये के इस्तेमाल से बचना चाहिए,ऊंचे तकिये पर सोते से गर्दन आगे की ओर झुक सकती है। इससे गर्दन की मांसपेशियों और आसपास की नसों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। लंबे समय तक ऐसे तकिए का इस्तेमाल करने से गर्दन में अकड़न, कंधों में दर्द या भारीपन, सुबह उठते समय सिरदर्द की समस्या होना, बार-बार नींद का टूटना, करवट लेकर सोने वालों को तकिए की ऊंचाई का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि गर्दन और रीढ़ की सीध बनाए रखना जरूरी होता है।
बहुत पतला तकिया भी हो सकता है समस्या का कारण
कुछ लोग बहुत पतले तकिये पर सोना पसंद करते हैं, लेकिन अगर तकिया सिर और गर्दन को पर्याप्त सहारा नहीं दे पा रहा है, तो रीढ़ की प्राकृतिक स्थिति प्रभावित हो सकती है। गर्दन में खिंचाव महसूस हो सकता है, लंबे समय तक सोने के बाद दर्द हो सकता है, शरीर में आराम की बजाय थकान महसूस हो सकती हैं।
गलत तकिये के यूज से बढ़ सकता है दर्द और थकान
नींद के दौरान शरीर कई घंटों तक एक ही स्थिति में रहता है। अगर इस दौरान गर्दन सही पोजीशन में नहीं रहती, तो मांसपेशियों पर दबाव बढ़ सकता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद गर्दन में दर्द, कंधों में जकड़न, सिर भारी लगना और शरीर में थकान जैसी समस्याएं महसूस होने लगती हैं।
सोने की पोजीशन के हिसाब से चुनें तकिया
हर व्यक्ति के लिए एक जैसा तकिया सही नहीं होता। आपकी सोने की आदत के अनुसार तकिए का चुनाव करना बेहतर रहता है। पीठ के बल सोने वाले लोगों के लिए मध्यम ऊंचाई वाला तकिया बेहतर विकल्प हो सकता है। ऐसा तकिया चुनें जो सिर को बहुत ऊपर न उठाए, गर्दन को प्राकृतिक सपोर्ट दे,सिर और रीढ़ के बीच संतुलन बनाए रखे। बहुत ऊंचा तकिया पीठ के बल सोने वालों में गर्दन पर दबाव बढ़ा सकता है। करवट लेकर सोने वाले लोगों के लिए थोड़ा ऊंचा और मजबूत तकिया मददगार हो सकता है।
दो से तीन साल के बीच में बदलें तकिया
कई लोग तकिए को वर्षों तक इस्तेमाल करते रहते हैं, लेकिन समय के साथ इसकी गुणवत्ता और सपोर्ट कम हो सकता है। आमतौर पर 1 से 3 साल के बीच तकिया बदलने पर विचार करना चाहिए, हालांकि यह तकिए की क्वालिटी और इस्तेमाल पर निर्भर करता है।










