दांत और डाइजेशन का रक्षक है सेब: आंखों की रोशनी और त्वचा चमकाने में बेस्ट, मुंह के बैक्टीरिया को भी करता ढेर

आंखों की रोशनी और त्वचा चमकाने में बेस्ट, मुंह के बैक्टीरिया को भी करता ढेर

सेब को सेहत के लिए फायदेमंद फलों में गिना जाता है। इसमें विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि रोजाना एक सेब खाने की सलाह लंबे समय से दी जाती रही है। सेब की एक चर्चित कहावत ‘रोज एक सेब खाओ और डॉक्टर को दूर भगाओ’ भी इसकी लोकप्रियता को बताती है। आयुर्वेद में भी सेब के सेवन को कई स्वास्थ्य समस्याओं में लाभकारी बताया गया है।

बहुत से लोग सेब का जूस पीना पसंद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सेब त्वचा रोग, जलन, दिल का दौरा, बुखार, कब्ज की परेशानी में लाभ पहुंचाता है। यह मानसिक विकार, एसिडिटी, बुखार, हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ पेचिश में भी फायदेमंद होता है। सेब का सेवन कमजोरी, बदहज़मी, सांसों की बीमारी में भी लाभदायक होता है। यह ल्यूकोरिया, दांतों की बीमारी, गठिया, पथरी और खून की कमी को दूर करता है।

दांत और मसूड़ों के लिए उपयोगी

सेब को चबाकर खाने से मुंह में लार का निर्माण बढ़ता है। इससे मुंह की सफाई में मदद मिलती है और बैक्टीरिया के बढ़ने की संभावना कम होती है। नियमित रूप से सेब खाने से दांत और मसूड़ों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।

आंखों की सेहत में भी फायदा

सेब में एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर, विटामिन-सी और विटामिन-बी पाए जाते हैं। इनके कारण सेब का नियमित सेवन आंखों की सेहत के लिए उपयोगी माना जाता है। इसे रात में कम दिखाई देने की परेशानी के साथ मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी समस्याओं से बचाव में भी फायदेमंद बताया गया है।

खांसी और पाचन में लाभ

आयुर्वेदिक उपयोगों में सेब का रस भी शामिल है। खांसी में एक गिलास सेब के रस में मिश्री मिलाकर सुबह पीने की सलाह दी गई है। इसे सूखी खांसी में लाभकारी बताया गया है। पके और मीठे सेब खाने को भी उपयोगी माना गया है। सेब में फाइबर होने के कारण इसे पाचन तंत्र के लिए भी फायदेमंद बताया गया है। आयुर्वेदिक विवरण में इसे कब्ज और पेट से जुड़ी परेशानियों में लाभकारी माना गया है।

आंतों और त्वचा पर भी असर

सेब के सेवन को आंतों के स्वास्थ्य के लिए भी उपयोगी बताया गया है। आंव वाली पेचिश में भुना हुआ सेब खाने का उल्लेख मिलता है। वहीं त्वचा संबंधी समस्याओं में सेब के पत्तों का लेप लगाने की बात कही गई है। सेब के पेड़ की जड़ पीसकर दाद-खाज वाली जगह पर लगाने का भी पारंपरिक उपयोग बताया गया है।

हिमालयी क्षेत्रों में होती है खेती

सेब मुख्य रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पैदा होने वाला फल है। उत्तरी-पश्चिमी हिमालय में करीब 2,700 मीटर की ऊंचाई तक इसकी खेती होती है। भारत में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में सेब का उत्पादन होता है। कश्मीर के सेब की खास पहचान है। इसे मध्य एशिया का फल माना जाता है, जो बाद में यूरोप तक पहुंचा। इसके बाद एशिया और यूरोप से उत्तरी अमेरिका तक इसका व्यापार होने लगा।

नव्य जागरण

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