बारिश के मौसम में कमजोर इम्यू​निटी वाले रहे सतर्क: बासी और स्ट्रीट फूड से बचें, बरसात में बढ़ जाता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

1 घंटा पहले
बासी और स्ट्रीट फूड से बचें, बरसात में बढ़ जाता है फूड पॉइजनिंग का खतरा

बरसात के दिनों में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं, जिससे खाने-पीने की चीजें जल्दी खराब होने लगती हैं। ऐसे में यदि भोजन की गुणवत्ता, साफ-सफाई या स्टोरेज पर ध्यान न दिया जाए, तो फूड पॉइजनिंग का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके कारण पेट दर्द, उल्टी, दस्त, बुखार, मतली और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो जाती हैं।

खासकर बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। बारिश के मौसम में खानपान में विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत होती है, जिससे फूड पॉइजनिंग के खतरे से बचा जा सके।

हमेशा ताजा भोजन करें और स्ट्रीट फूड से बचें

मानसून में भोजन जल्दी खराब हो सकता है। इसलिए हमेशा ताजा बना हुआ और अच्छी तरह पका भोजन ही खाएं। लंबे समय तक रखा हुआ या बासी खाना खाने से बचें। साथ ही खुले में बिकने वाले गोलगप्पे, चाट, कटे फल, पकौड़े और अन्य खुले खाद्य पदार्थों को खाने से बचें। खुले खाद्य पदार्थों पर मक्खियां और बैक्टीरिया आसानी से जमा हो जाते है जो फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।

दू​षित पानी से बचें, फल और स​ब्जियों का अच्छे से साफ करें

दूषित पानी फूड पॉइजनिंग और पेट के संक्रमण का सबसे बड़ा कारण होता है। मानसून में हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं। बारिश में फल और सब्जियों पर कीटनाशक, मिट्टी और बैक्टीरिया हो सकते हैं। इन्हें साफ पानी से अच्छी तरह धोकर ही इस्तेमाल करें। पत्तेदार सब्जियों की सफाई पर विशेष ध्यान दें।

खाने को अच्छे से स्टोर करने के साथ सफाई का भी रखें ख्याल

बचा हुआ खाना कमरे के तापमान पर लंबे समय तक न रखें। इसे एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज में रखें और दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करें। खाना बनाने और खाने से पहले कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं। बाहर से आने के बाद भी हाथ साफ करना जरूरी है।

डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ कच्चे और पके भोजन पर दें विशेष ध्यान

दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद जल्दी खराब हो सकते हैं। हमेशा ताजा डेयरी प्रोडक्ट्स का ही सेवन करें और एक्सपायरी डेट की जांच जरूर करें। कच्चे मांस, मछली या अंडे को पके हुए भोजन से अलग रखें। इससे क्रॉस-कंटैमिनेशन का खतरा कम होता है।

नव्य जागरण

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