तेज धूप से सीधे एसी में जाना पड़ सकता है भारी: बढ़ रहे स्किन एलर्जी और रैशेज के मामले, लगातार डायपर पहनाना बच्चों के लिए नुकसानदायक

भीषण गर्मी के बीच तेज धूप से निकलकर सीधे एसी वाले कमरे में पहुंचना स्किन के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। अस्पतालों की ओपीडी में इन दिनों स्किन एलर्जी, खुजली, घमौरियां और रैशेज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि थोड़ी सावधानी बरतकर इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव किया जा सकता है।
पिछले तीन-चार दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब लोगों की त्वचा पर भी दिखाई देने लगा है। अस्पतालों में स्किन संबंधी बीमारियों के मरीज पहले की तुलना में अधिक संख्या में पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार तेज धूप और अल्ट्रावायलेट (यूवी) किरणों के संपर्क में रहने के बाद अचानक एसी या अत्यधिक ठंडे वातावरण में जाने से त्वचा तेजी से प्रतिक्रिया करती है। इसके कारण एलर्जी, लाल चकत्ते, खुजली और घमौरियों जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। लगातार पसीना आने और त्वचा के लंबे समय तक गीली रहने से इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ जाता है।
ओपीडी में रोज बढ़ रहे मरीज
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इन दिनों ओपीडी में प्रतिदिन 30 से 35 मरीज स्किन एलर्जी और त्वचा संबंधी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में अत्यधिक गर्मी और शरीर के तापमान में अचानक होने वाला बदलाव त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा पर असर डालता है। समय रहते सावधानी न बरतने पर इंफेक्शन और एलर्जी दोनों गंभीर रूप ले सकते हैं।
बच्चों की स्किन को रखें सूखा और सुरक्षित
डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों की त्वचा पर देखा जा रहा है। रोजाना 15 से 20 बच्चे घमौरियां, लाल दाने, खुजली और रैशेज की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि बच्चों को जरूरत से ज्यादा कपड़े न पहनाएं और उनकी स्किन को अधिक समय तक गीला न रहने दें। छोटे बच्चों को लंबे समय तक लगातार डायपर पहनाकर रखना भी नुकसानदायक हो सकता है। बीच-बीच में डायपर हटाकर त्वचा को खुली हवा मिलने देना जरूरी है।
रोजाना अपनाएं त्वचा की देखभाल
चिकित्सकों का सुझाव है कि गर्मी और बरसात के मौसम में भी नियमित रूप से मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करें और घर से बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन अवश्य लगाएं। पसीना आने पर उसे तुरंत साफ करें। शरीर के वे हिस्से जहां त्वचा मुड़ती है, जैसे गर्दन, कोहनी के अंदरूनी भाग, घुटनों के पीछे और जांघों के बीच, वहां विशेष साफ-सफाई और सूखापन बनाए रखें। इन स्थानों पर अधिक देर तक नमी रहने से बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
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