मानसून में बढ़ती है जोड़ों की तकलीफ: नमी से मांसपेशियां और जोड़ होते हैं संवेदनशील, बदलते वातावरण से प्रभावित होता है शरीर

मानसून के मौसम में घुटनों, कंधों, कमर और टखनों में दर्द या अकड़न की शिकायत बढ़ना आम बात है। यह समस्या केवल गठिया के मरीजों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई स्वस्थ लोगों को भी मौसम बदलने के साथ जोड़ों में असहजता महसूस होने लगती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार बारिश के मौसम में वातावरण में होने वाले बदलाव शरीर पर असर डालते हैं। इससे जोड़ों का दर्द बढ़ सकता है। हालांकि इसकी वजह हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। ऐसे में दर्द के कारणों को समझना, समय रहते बचाव के उपाय अपनाना और गंभीर लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद जरूरी है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक बारिश के दौरान वायुदाब में कमी आने से जोड़ों के आसपास मौजूद ऊतकों पर दबाव बदल जाता है। इस कारण घुटनों और अन्य जोड़ों में दर्द तथा अकड़न अधिक महसूस हो सकती है। वहीं मानसून में हवा में नमी बढ़ने से मांसपेशियां और जोड़ अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इसका असर विशेष रूप से सुबह के समय दिखाई देता है, जब उठते ही जकड़न और असहजता महसूस होती है।
निष्क्रिय दिनचर्या भी बढ़ाती है परेशानी
बारिश के कारण लोग सामान्य दिनों की तुलना में कम चल-फिर पाते हैं और अधिक समय घर के भीतर बिताते हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने से जोड़ों की सक्रियता घटती है। इससे दर्द और जकड़न बढ़ सकती है। इसके अलावा जिन लोगों के घुटनों या अन्य जोड़ों में पहले कभी चोट लगी हो, उनमें मौसम बदलने के दौरान दर्द दोबारा उभरने की संभावना अधिक रहती है। ठंडा और नम वातावरण मांसपेशियों को भी सख्त बना देता है। इससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
राहत के लिए अपनाएं ये आसान उपाय
एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि मानसून में भी नियमित रूप से हल्की एक्सरसाइज और स्ट्रेचिंग जारी रखनी चाहिए। शरीर को गर्म रखने, गुनगुने पानी से सिकाई करने और लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने से बचने से भी राहत मिल सकती है। वजन नियंत्रित रखना, कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन से भरपूर संतुलित आहार लेना तथा पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जोड़ों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है। दर्द लगातार बना रहने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर होता है।
इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
जोड़ों का दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, सूजन बढ़ने लगे, चलने-फिरने में कठिनाई हो, जोड़ों में लालपन या गर्माहट महसूस हो, तेज दर्द के साथ बुखार आए या दैनिक गतिविधियां प्रभावित होने पर तुरंत डॉक्टर या हड्डी रोग एक्सपर्ट से जांच करानी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि समय पर इलाज शुरू होने से गंभीर समस्याओं से बचाव संभव है।
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