मानसून में खानपान में बरतें सतर्कता: लापरवाही से इंफेक्शन का खतरा, नमी में तेजी से पनपते हैं बैक्टीरिया

1 घंटा पहले
लापरवाही से इंफेक्शन का खतरा, नमी में तेजी से पनपते हैं बैक्टीरिया

बारिश के मौसम में वातावरण में बढ़ी नमी के कारण बैक्टीरिया और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में खानपान में बरती गई छोटी सी लापरवाही भी फूड पॉइजनिंग, पेट के इंफेक्शन, वायरल बुखार और पाचन संबंधी समस्याओं की वजह बन सकती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि मानसून के दौरान कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना या उनसे परहेज करना बेहतर रहता है।

एक्सपर्ट्स के अनुसार मानसून में सिर्फ साफ-सफाई का ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है। इस मौसम में भोजन का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान न दिया जाने पर इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। इसलिए मौसम के अनुरूप संतुलित और ताजा भोजन का सेवन करना जरूरी है।

हरी पत्तेदार सब्जियों की अच्छी तरह करें सफाई

बारिश के दौरान पालक, मेथी, सरसों, पत्ता गोभी और लेट्यूस जैसी पत्तेदार सब्जियों पर बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़े आसानी से पनप सकते हैं। इनकी पत्तियों के बीच गंदगी और सूक्ष्म जीव छिपे रह सकते हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि ऐसी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और पूरी तरह पकाने के बाद ही सेवन किया जाए, ताकि इंफेक्शन का खतरा कम हो सके।

खुले में मिलने वाले खाद्य पदार्थों से रहें दूर

मानसून में सड़क किनारे मिलने वाले गोलगप्पे, चाट, समोसे, टिक्की और अन्य खुले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं। नमी और खुले वातावरण के कारण इनमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित होते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों के सेवन से फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, डायरिया और पेट के इंफेक्शन की आशंका बढ़ जाती है। एक्सपर्ट्स इस मौसम में घर का ताजा और स्वच्छ भोजन खाने की सलाह देते हैं।

कटे हुए फलों से बढ़ सकता है इंफेक्शन

बाजार और ठेलों पर लंबे समय तक खुले में रखे कटे हुए फल जल्दी खराब हो सकते हैं। देखने में ताजे लगने के बावजूद इनमें बैक्टीरिया और फंगस मौजूद हो सकते हैं। ऐसे फलों का सेवन पेट खराब होने, उल्टी, दस्त और इंफेक्शन का कारण बन सकता है। एक्सपर्ट्स हमेशा ताजे फल खरीदने और उन्हें घर पर धोकर काटने की सलाह देते हैं।

सी-फूड का सेवन सोच-समझकर करें

हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार मानसून समुद्री जीवों के प्रजनन का मौसम होता है। इस दौरान यदि मछली, झींगा या अन्य सी-फूड ताजा न हो या सही तरीके से संग्रहित न किया गया हो तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं। इससे फूड इंफेक्शन, एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए इस मौसम में सी-फूड खरीदते समय उसकी ताजगी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आवश्यकता से अधिक सेवन से बचना चाहिए।

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