नींद में सांस रुकना स्लीप एपनिया का संकेत: मरीजों को नहीं होता इसका एहसास, समय रहते कराएं जांच

अच्छी सेहत के लिए संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली जितनी जरूरी है, उतनी ही महत्वपूर्ण पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद भी है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद लेनी चाहिए। हालांकि, कई लोग पर्याप्त समय बिस्तर पर बिताने के बावजूद पूरी तरह तरोताजा महसूस नहीं करते। इसके पीछे स्लीप एपनिया जैसी गंभीर नींद संबंधी समस्या जिम्मेदार हो सकती है। इसके बारे में अक्सर मरीजों को खुद भी जानकारी नहीं होती।
स्लीप एपनिया एक ऐसा स्लीप डिसऑर्डर है। इसमें सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकंड के लिए बार-बार रुक जाती है। फिर दोबारा शुरू होती है। इस प्रक्रिया के कारण शरीर और मस्तिष्क को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। परिणामस्वरूप नींद बार-बार बाधित होती है। व्यक्ति को पूरी रात आराम नहीं मिल पाता। कई मामलों में मरीज को इसका एहसास भी नहीं होता। लेकिन उसका शरीर लगातार तनाव की स्थिति में बना रहता है।
तेज खर्राटों को न करें नजरअंदाज
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बहुत से लोग तेज खर्राटों को गहरी नींद का संकेत मान लेते हैं। वहीं, कई बार यह स्लीप एपनिया का प्रमुख लक्षण हो सकता है। इस समस्या से पीड़ित लोगों को सुबह उठने पर सिरदर्द, दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और अत्यधिक नींद आने जैसी परेशानियां हो सकती हैं। लंबे समय तक इसका इलाज न होने पर हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।
किन कारणों से बढ़ता है खतरा?
हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, गले की संकरी वायुनली, बढ़े हुए टॉन्सिल और कुछ हार्मोनल असंतुलन स्लीप एपनिया का जोखिम बढ़ा सकते हैं। गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी जमा होने से भी सांस की नली पर दबाव पड़ता है। इससे यह समस्या विकसित हो सकती है। परिवार के सदस्य रात में सांस रुकने या अत्यधिक खर्राटे लेने की शिकायत करने पर इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
इन लोगों में अधिक रहता है जोखिम
रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिक वजन वाले लोगों, 40 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित व्यक्तियों में स्लीप एपनिया का खतरा अपेक्षाकृत अधिक देखा जाता है। समय पर इलाज न मिलने की स्थिति में यह समस्या अनियमित हृदय गति, स्ट्रोक, हार्ट अटैक और याददाश्त संबंधी परेशानियों का कारण भी बन सकती है।
बचाव और इलाज के उपाय
डॉक्टरों के मुताबिक, वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना और पर्याप्त नींद लेना स्लीप एपनिया के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पीठ के बजाय करवट लेकर सोने की आदत भी लाभकारी मानी जाती है। गंभीर मामलों में चिकित्सक कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर (सीपीएपी) मशीन की सलाह देते हैं, जो सोते समय वायुमार्ग को खुला रखने में मदद करती है। समय रहते पहचान और इलाज से इस समस्या के गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









