स्क्रीन टाइम बढ़ा तो बढ़ेगा खतरा: लैपटॉप से हो सकती हैं ये परेशानियां, कीबोर्ड और स्क्रीन से फैलता है इंफेक्शन

21 घंटे पहले
लैपटॉप से हो सकती हैं ये परेशानियां, कीबोर्ड और स्क्रीन से फैलता है इंफेक्शन

डिजिटल युग में लैपटॉप हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। ऑफिस के कामकाज से लेकर ऑनलाइन शिक्षा, मनोरंजन और सोशल मीडिया तक, लगभग हर गतिविधि अब स्क्रीन पर सिमटती जा रही है। खासकर वर्क फ्रॉम होम और हाइब्रिड वर्क कल्चर के बढ़ते चलन ने लोगों का स्क्रीन टाइम पहले के मुकाबले काफी बढ़ा दिया है। हालांकि तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है। लेकिन इसका अत्यधिक और असावधानीपूर्ण उपयोग स्वास्थ्य के लिए कई नई चुनौतियां भी खड़ी कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक लैपटॉप के सामने बैठना, उसकी नियमित सफाई न करना और गलत तरीके से उपयोग करना कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं को जन्म दे सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार लैपटॉप कीबोर्ड और टचपैड पर बड़ी मात्रा में धूल, गंदगी और सूक्ष्म जीव जमा हो सकते हैं। कई लोग काम के दौरान बार-बार चेहरे, आंखों या मुंह को छूते हैं। जिससे बैक्टीरिया और वायरस शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। यदि लैपटॉप की नियमित सफाई नहीं की जाती तो यह संक्रमण फैलाने का माध्यम बन सकता है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों में एलर्जी, खुजली और त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ लैपटॉप इस्तेमाल करने के बाद हाथ धोने और समय-समय पर डिवाइस को सैनिटाइज करने की सलाह देते हैं।

स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों पर पड़ रहा दबाव

लंबे समय तक लैपटॉप स्क्रीन पर लगातार नजर टिकाए रखना आंखों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक लगातार स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, लालिमा और धुंधलापन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ या ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ कहा जाता है। स्क्रीन की तेज रोशनी और लगातार फोकस बनाए रखने के कारण आंखों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए तो सिरदर्द, आंखों की थकान और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं भी विकसित हो सकती हैं। विशेषज्ञ 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह देते हैं। जिसके तहत हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखना लाभदायक माना जाता है।

गलत पोस्चर से बढ़ रही गर्दन और कमर की परेशानी

लैपटॉप पर काम करते समय अधिकांश लोग झुककर बैठते हैं या लंबे समय तक एक ही स्थिति में बने रहते हैं। इससे गर्दन, कंधों और कमर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। फिजियोथेरेपिस्टों के अनुसार गलत पोस्चर के कारण सर्वाइकल दर्द, पीठ दर्द और मांसपेशियों में अकड़न जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। वर्क फ्रॉम होम करने वाले लोगों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है।क्योंकि कई बार वे उचित कुर्सी और टेबल का उपयोग नहीं करते। लगातार गलत मुद्रा में बैठने से रीढ़ की हड्डी के प्राकृतिक संतुलन पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

ब्लू लाइट बिगाड़ सकती है नींद का चक्र

विशेषज्ञों का कहना है कि लैपटॉप और अन्य डिजिटल डिवाइस से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकती है। रात में देर तक स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है। जो बेहतर नींद के लिए आवश्यक माना जाता है। इसके परिणामस्वरूप अनिद्रा, बार-बार नींद टूटना और सुबह थकान महसूस होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। लगातार खराब नींद न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। इससे तनाव, चिड़चिड़ापन और कार्यक्षमता में भी गिरावट आ सकती है।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लैपटॉप का संतुलित उपयोग, नियमित ब्रेक, सही बैठने की मुद्रा, स्क्रीन की उचित दूरी और डिवाइस की साफ-सफाई जैसी छोटी-छोटी आदतें बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती हैं। तकनीक आधुनिक जीवन की जरूरत है। लेकिन इसका जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग ही बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादक जीवनशैली की कुंजी है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।