मानसून में बीमारियों की एंट्री: रखें साफ-सफाई का विशेष ध्यान, नम वातावरण में संक्रमण का अधिक खतरा

मानसून अपने साथ ठंडी हवाएं, हरियाली और राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इस मौसम में शरीर से जुड़ी समस्याएं तेजी से फैलती हैं। इसके अलावा गीले कपड़े पहनना, दूषित पानी पीना, बाहर का अस्वच्छ भोजन खाना और साफ-सफाई में लापरवाही भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।
बरसात के मौसम में बीमारियां बढ़ने का मुख्य कारण वातावरण में अत्यधिक नमी, जगह-जगह जलभराव और तापमान में अचानक गिरावट है, जो बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल बनाते हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस मौसम में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में आम दिनों के मुकाबले 30 से 40% तक ज्यादा मरीज दर्ज किए जाते हैं।
कमरों की नमी और पानी का जमाव
बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह वातावरण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। नमी के कारण कपड़े, बिस्तर और घर के कोने लंबे समय तक गीले रहते हैं, जिससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बंद कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन न होने से भी संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसी वजह से मानसून में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं। बारिश के बाद सड़कों, गड्ढों, पार्कों, छतों, कूलर, गमलों और घरों के आसपास पानी जमा हो जाता है। यह जमा हुआ पानी मच्छरों के अंडे देने और उनके तेजी से बढ़ने के लिए आदर्श स्थान बन जाता है। खासतौर पर एडीज मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं, जबकि एनोफिलीज मच्छर मलेरिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
ताजा और गर्म भोजन का उपयोग
मानसून के दौरान बारिश का पानी अक्सर पीने के पानी के स्रोतों को दूषित कर देता है। कई बार सीवर का पानी भी पीने के पानी में मिल जाता है, जिससे हैजा, टाइफाइड, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खुले में बिकने वाला स्ट्रीट फूड, कटे हुए फल और लंबे समय तक रखा हुआ भोजन बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है। इसलिए इस मौसम में हमेशा ताजा, गर्म और साफ भोजन खाने की सलाह दी जाती है।
संतुलित आहार और खान-पान को विशेष ख्याल
बारिश के मौसम में तापमान और मौसम में बार-बार बदलाव होने से शरीर को खुद को अनुकूल बनाने में समय लगता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) अस्थायी रूप से कमजोर पड़ सकती है। जिन लोगों की पहले से इम्यूनिटी कम होती है, जैसे बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग, वे वायरल संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम इस मौसम में बेहद जरूरी है।
भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें
बारिश में भीगने के बाद यदि व्यक्ति लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रहता है, तो शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है। इससे सर्दी, खांसी, गले में संक्रमण और वायरल फीवर का खतरा बढ़ जाता है। गीले जूते और मोजे पहनने से पैरों में फंगल इंफेक्शन, खुजली और बदबू की समस्या भी हो सकती है। इसलिए बारिश में भीगने के तुरंत बाद सूखे कपड़े पहनना और शरीर को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
बारिश में होने वाली आम बीमारियां
बारिश का मौसम मतलब छोटी-छोटी बीमारियों का दस्तक। जिसमें,वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम, डेंगू, मलेरिया,चिकनगुनिया, टाइफाइड, फूड पॉइजनिंग, हैजा, दस्त, फंगल इंफेक्शन, स्किन एलर्जी, पेट का संक्रमण
बारिश में होने वाली बीमारियों से बचाव
बारिश के मौसम में विशेषतौर पर सतर्कता बरतनी चााहिए। जैसे-उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं। बाहर का खुला खाना खाने से बचें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं। भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें। हाथों को साबुन से नियमित धोएं। ताजे और गर्म भोजन का सेवन करें। विटामिन-सी और प्रोटीन युक्त आहार लें। पर्याप्त नींद लें और शरीर को हाइड्रेट रखें। तेज बुखार या लगातार कमजोरी होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
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