60 की उम्र में भी फिटनेस का कमाल: रोजाना योग से स्वस्थ रहेगा शरीर, लचक और संतुलन बनाए रखने में मददगार

निवेदिता चंद|20 घंटे पहले
रोजाना योग से  स्वस्थ रहेगा शरीर, लचक और संतुलन बनाए रखने में मददगार

बढ़ती उम्र के साथ शरीर में बदलाव आना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। 50 से 60 वर्ष की आयु के बाद जोड़ों में दर्द, शरीर में अकड़न, कम होती ऊर्जा, तनाव, चिंता और नींद से जुड़ी समस्याएं आम हो जाती हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोका नहीं जा सकता। लेकिन इसके प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसके लिए योग सबसे प्रभावी और प्राकृतिक उपायों में से एक माना जाता है। नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को लचीला और मजबूत बनाए रखता है। साथ ही मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है। यही कारण है कि आज देश-दुनिया में बड़ी संख्या में लोग योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सही तरीके से किया गया योग व्यक्ति को लंबे समय तक सक्रिय, ऊर्जावान और आत्मविश्वास से भरपूर बनाए रखने में मदद कर सकता है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की लचक कम होने लगती है।संतुलन बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इसके कारण गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है। योगासन शरीर की मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों को सक्रिय बनाए रखते हैं। जिससे लचीलापन और संतुलन बेहतर होता है। विशेषज्ञों के अनुसार वृक्षासन, ताड़ासन और त्रिकोणासन जैसे आसनों का नियमित अभ्यास शरीर के संतुलन को मजबूत करता है। इससे दैनिक गतिविधियां आसान हो जाती हैं और व्यक्ति अधिक चुस्त-दुरुस्त महसूस करता है। नियमित योगाभ्यास से शरीर की गतिशीलता बनी रहती है। जो स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है।

जोड़ों के दर्द और अकड़न से मिलती है राहत

वरिष्ठ नागरिकों में घुटनों, कमर और गर्दन के दर्द की समस्या तेजी से बढ़ रही है। लंबे समय तक बैठने, शारीरिक गतिविधियों में कमी और उम्र संबंधी बदलावों के कारण जोड़ों में अकड़न भी बढ़ जाती है। योग शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाकर इन समस्याओं को कम करने में मदद करता है। भुजंगासन, मार्जरी आसन और पवनमुक्तासन जैसे योगासन जोड़ों की गतिशीलता बढ़ाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक माने जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से दर्द में राहत मिलती है। शरीर पहले की तुलना में अधिक सक्रिय महसूस करता है।

मानसिक तनाव कम कर बढ़ाता है सकारात्मकता

आधुनिक जीवनशैली में मानसिक स्वास्थ्य भी बड़ी चुनौती बन चुका है। बढ़ती उम्र के साथ अकेलापन, चिंता और तनाव जैसी समस्याएं कई लोगों को प्रभावित करती हैं। योग और प्राणायाम मन को शांत रखने तथा भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भ्रामरी प्राणायाम, अनुलोम-विलोम, सेतुबंधासन और शवासन जैसे अभ्यास मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। इसके अलावा ध्यान की तकनीकें मन को स्थिर बनाती हैं। सकारात्मक सोच विकसित करने में सहायक होती हैं। इससे व्यक्ति जीवन के प्रति अधिक उत्साहित और आशावादी बना रहता है।

बेहतर नींद और नई ऊर्जा का स्रोत

अनिद्रा और खराब नींद की समस्या भी उम्र बढ़ने के साथ बढ़ जाती है। पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद न मिलने से थकान, चिड़चिड़ापन और स्वास्थ्य संबंधी कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं। योग शरीर और मन को आराम देकर नींद की गुणवत्ता सुधारने में मदद करता है। बालासन, बद्ध कोणासन और विपरीत करणी आसन जैसे योगासन शरीर को रिलैक्स करते हैं। गहरी नींद लाने में सहायक होते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित योगाभ्यास से शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है, जिससे व्यक्ति 60 वर्ष की उम्र में भी खुद को 30 वर्ष जैसा सक्रिय, फिट और ऊर्जावान महसूस कर सकता है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।