पेपर कप में चाय कितनी सुरक्षित?: गर्म पेय के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं माइक्रोप्लास्टिक, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

निवेदिता चंद|20 घंटे पहले
गर्म पेय के साथ शरीर में पहुंच सकते हैं माइक्रोप्लास्टिक, विशेषज्ञों ने दी सतर्क रहने की सलाह

सुबह की पहली चाय से लेकर ऑफिस ब्रेक तक, देशभर में करोड़ों लोग हर दिन पेपर कप में चाय और कॉफी का सेवन करते हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों, सड़क किनारे की दुकानों और कॉर्पोरेट दफ्तरों में पेपर कप अब आम इस्तेमाल की चीज बन चुके हैं। प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इन्हें अपेक्षाकृत सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इनके इस्तेमाल को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश पेपर कप पूरी तरह कागज से नहीं बने होते। उनके अंदर प्लास्टिक या अन्य रासायनिक पदार्थों की पतली परत चढ़ाई जाती है। यही परत गर्म पेय पदार्थों के संपर्क में आने पर स्वास्थ्य के लिए चिंता का कारण बन सकती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि रोजाना पेपर कप में चाय पीने की आदत शरीर और पर्यावरण पर किस तरह असर डाल सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादातर डिस्पोजेबल पेपर कप के अंदर पॉलीथीन या अन्य प्लास्टिक आधारित कोटिंग की जाती है। जिससे कप में रखा गया तरल पदार्थ बाहर न निकले। जब इन कपों में गर्म चाय या कॉफी डाली जाती है। तब उच्च तापमान के कारण सूक्ष्म प्लास्टिक कण और माइक्रोप्लास्टिक पेय पदार्थ में मिल सकते हैं। लगातार ऐसे पेय का सेवन करने पर ये कण शरीर के अंदर पहुंच सकते हैं। हालांकि इनका दीर्घकालिक प्रभाव अभी शोध का विषय है। लेकिन वैज्ञानिक समुदाय माइक्रोप्लास्टिक को लेकर लगातार चिंता जता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार ऐसे कपों का उपयोग करने से स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

रासायनिक तत्व भी बढ़ा सकते हैं खतरा

पेपर कप की कोटिंग में इस्तेमाल होने वाले कुछ रासायनिक पदार्थ गर्मी के संपर्क में आकर पेय पदार्थ में घुल सकते हैं। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क में रहने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जाती है। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि प्लास्टिक आधारित कुछ तत्व हार्मोनल सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि इस विषय पर अभी और वैज्ञानिक अध्ययन किए जा रहे हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञ एहतियात बरतने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि जहां संभव हो, वहां पेपर कप के बजाय सुरक्षित विकल्पों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

पर्यावरण के लिए भी चुनौती बन रहे हैं पेपर कप

पेपर कप को अक्सर पर्यावरण हितैषी उत्पाद माना जाता है। लेकिन वास्तविकता इससे कुछ अलग है। कागज और प्लास्टिक की मिश्रित संरचना होने के कारण इन कपों को पूरी तरह रीसाइकिल करना आसान नहीं होता। बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होने के बाद ये कचरे के रूप में पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सिंगल यूज उत्पादों पर बढ़ती निर्भरता पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी प्रभावित कर रही है।

क्या हैं बेहतर विकल्प?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चाय और कॉफी पीने के लिए स्टील, कांच, सिरेमिक या मिट्टी के कुल्हड़ जैसे विकल्पों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि किसी कारणवश पेपर कप का उपयोग करना पड़े तो केवल गुणवत्ता प्रमाणित उत्पादों का ही चयन करें। गर्म पेय पदार्थ को लंबे समय तक कप में न रखें। छोटी-सी सावधानी न केवल स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम कर सकती है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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