मानसून में हरी सब्जियां खाते वक्त बरतें सावधानी: जरा सी लापरवाही बढ़ा सकती है इंफेक्शन का खतरा, बिना साफ किए खाने से होगी दिक्कत

1 घंटा पहले
जरा सी लापरवाही बढ़ा सकती है इंफेक्शन का खतरा, बिना साफ किए खाने से होगी दिक्कत

बरसात का मौसम शुरू होते ही खानपान को लेकर कई तरह की सलाहें सामने आने लगती हैं। इनमें सबसे सामान्य सलाह पत्तेदार हरी सब्जियों का सीमित सेवन करने की होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह केवल पारंपरिक मान्यता नहीं, बल्कि इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी हैं। मानसून के दौरान वातावरण में बढ़ी नमी के कारण हरी सब्जियों में बैक्टीरिया, फंगस और अन्य सूक्ष्म जीव तेजी से पनप सकते हैं। ऐसे में इन्हें बिना अच्छी तरह साफ किए खाने से पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।

बारिश के मौसम में पालक, मेथी, बथुआ और अन्य पत्तेदार सब्जियों पर बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़े आसानी से विकसित हो जाते हैं। इन्हें ठीक से साफ किए बिना उपयोग करने पर पेट में इंफेक्शन, फूड पॉइजनिंग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। इसके अलावा इन सब्जियों की पत्तियों में मिट्टी, गंदगी और कीटनाशकों के अवशेष भी अधिक मात्रा में चिपके रह सकते हैं। इन्हें पूरी तरह साफ करना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक कठिन होता है।

पाचन संबंधी बढ़ सकती हैं दिक्कतें

एक्सपर्ट्स के अनुसार दूषित या ठीक से साफ न की गई पत्तेदार सब्जियां दस्त, गैस, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याओं का कारण बन सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इंफेक्शन का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है। इसलिए इन वर्गों को मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

सही तरीके से साफ कर पकाने पर मिलेंगे पूरे लाभ

यदि मानसून में पत्तेदार सब्जियां खानी हों तो उन्हें कई बार साफ पानी से धोना चाहिए। आवश्यकता होने पर नमक या बेकिंग सोडा मिले पानी में कुछ देर भिगोकर रखने के बाद अच्छी तरह पकाकर ही सेवन करना बेहतर माना जाता है। इस मौसम में कच्ची पत्तेदार सब्जियों और बाहर मिलने वाले सलाद से परहेज करना चाहिए। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि हमेशा ताजी और साफ सब्जियां ही खरीदें तथा लंबे समय से स्टोर की गई या मुरझाई हुई पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बचें। उचित सफाई और सही तरीके से पकाने पर इनके पोषक तत्वों का लाभ भी मिलता है और इंफेक्शन का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है।

नव्य जागरण

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