ईरान-इजराइल तनाव; वार्ताकारों पर हमले की आशंका: अमेरिका ने तेहरान को किया था सतर्क, खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे पाक पीएम

अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दे पर जारी बातचीत के दौरान इजराइल की संभावित कार्रवाई को लेकर नई जानकारी सामने आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को आशंका थी कि इजराइल ईरानी वार्ता प्रतिनिधियों को निशाना बना सकता है। इसी खतरे को देखते हुए तेहरान को सहयोगी देशों के माध्यम से सतर्क रहने का संदेश भेजा गया था। इस बीच लेबनान में शिक्षा व्यवस्था पर संघर्ष का असर और ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां भी चर्चा में हैं।
अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका को डर था कि इजराइल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ को निशाना बना सकता है। माना गया कि वार्ता में शामिल प्रमुख नेताओं पर हमला होने पर युद्धविराम और कूटनीतिक प्रक्रिया पर गंभीर असर पड़ सकता था। इसी वजह से अमेरिका ने मध्य-पूर्व के कुछ सहयोगी देशों के जरिए ईरान को सतर्क रहने का संदेश भेजा। उस समय ट्रम्प प्रशासन होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौते की दिशा में प्रयासरत था।
पाकिस्तान दौरे में भी बढ़ाई गई थी सुरक्षा
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान में प्रस्तावित एक बैठक से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर हमले की आशंका जताई गई थी। सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान ने प्रतिनिधिमंडल के विमान को लड़ाकू विमानों की सुरक्षा में इस्लामाबाद तक पहुंचाया। वापसी के दौरान भी सुरक्षा अलर्ट मिलने पर विमान की मशहद में आपात लैंडिंग कराई गई। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल सड़क मार्ग से तेहरान पहुंचा।
लेबनान में संघर्ष का असर शिक्षा पर
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी यूनिसेफ ने चेतावनी दी है कि क्षतिग्रस्त स्कूलों की शीघ्र मरम्मत नहीं होने पर लेबनान में एक लाख से अधिक बच्चे इस वर्ष स्कूल नहीं जा सकेंगे। जून में लेबनान के शिक्षा मंत्रालय और यूनिसेफ की संयुक्त समीक्षा में सामने आया कि इजराइल-हिजबुल्लाह संघर्ष के दौरान 340 स्कूल प्रभावित हुए। इनमें 17 पूरी तरह नष्ट हो गए।
खामेनेई के अंतिम संस्कार की व्यापक तैयारियां
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई का अंतिम संस्कार चार से नौ जुलाई तक आयोजित किया जाएगा। इसे देश के इतिहास के सबसे बड़े राजकीय अंतिम संस्कारों में शामिल माना जा रहा है। समारोह में 1.5 से दो करोड़ लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इसके चलते पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। 30 से अधिक देशों के नेता और प्रतिनिधि तथा 90 देशों के धार्मिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। पाकिस्तान, रूस और चीन सहित कई देशों ने अपने प्रतिनिधिमंडल भेजने की पुष्टि की है।
हत्या स्थल पर ले जाया गया ताबूत
अली खामेनेई का ताबूत उस स्थान पर ले जाया गया, जहां 28 फरवरी को अमेरिका-इजराइल के हवाई हमले में उनकी मौत हुई थी। इसके बाद चार और पांच जुलाई को तेहरान में सार्वजनिक अंतिम दर्शन, नमाज-ए-जनाजा और अंतिम यात्रा का आयोजन होगा। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने कई मार्गों पर अंतिम यात्रा निकालने तथा मेट्रो और बस सेवाओं को पूर्ण क्षमता से संचालित करने की तैयारी की है। पाकिस्तान के गृह मंत्री सैयद मोहसिन नकवी अंतिम संस्कार में शामिल होने ईरान पहुंच चुके हैं। वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भी समारोह में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
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