CBSE में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर, OSM टेंडर की जांच शुरू

नई दिल्ली|18 घंटे पहले
चेयरमैन और सचिव का ट्रांसफर, OSM टेंडर की जांच शुरू

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सरकार ने बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है। साथ ही OSM सेवा से जुड़े टेंडर और खरीद प्रक्रिया की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया है। सरकार ने 2001 बैच के सीनियर आईएएस अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को नया चेयरमैन तथा भारतीय सूचना सेवा (IIS) के 2008 बैच के अधिकारी वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया है। शिक्षा क्षेत्र में हाल के वर्षों में यह सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

OSM प्रणाली में कथित खामियों का खुलासा करने वाले 12वीं कक्षा के छात्र सार्थक सिद्धांत संसद की स्थायी समिति के समक्ष पेश हुए। यह पहला अवसर माना जा रहा है जब किसी शिक्षा संबंधी मामले में एक छात्र को सीधे अपनी बात रखने के लिए संसदीय समिति के सामने बुलाया गया। सार्थक ने समिति को बताया कि OSM प्रणाली में कम से कम 15 गंभीर तकनीकी और प्रक्रियागत खामियां मौजूद हैं। उन्होंने अपने शोध, दस्तावेजी विश्लेषण और सार्वजनिक अभिलेखों के आधार पर कई सवाल उठाए हैं। समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने बताया कि छात्र द्वारा प्रस्तुत तथ्यों और CBSE के जवाबों का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

टेंडर प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

सार्थक सिद्धांत ने केवल मूल्यांकन प्रणाली ही नहीं, बल्कि OSM सेवा के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि सीबीएसई के सैकड़ों सार्वजनिक दस्तावेजों के अध्ययन के दौरान उन्हें कई ऐसी विसंगतियां मिलीं। जिनसे टेंडर आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। जांच समिति को टेंडर जारी करने, चयन प्रक्रिया और तकनीकी मानकों की समीक्षा का जिम्मा सौंपा गया है।

री-इवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक

विवाद के बीच CBSE का री-इवैल्यूएशन पोर्टल भी साइबर हमले का शिकार हो गया। बोर्ड के अनुसार महज दो मिनट के भीतर पोर्टल पर लगभग 15 लाख एक्सेस अटेंप्ट दर्ज किए गए। वहीं एक लाख से अधिक बार सिस्टम फाइलों तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की गई। इसके बावजूद तकनीकी टीम ने पोर्टल को चालू रखा। दोपहर तीन बजे तक 16 हजार से अधिक छात्र पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर चुके थे। गौरतलब है कि यह पोर्टल पहले भी कई बार तकनीकी समस्याओं के कारण प्रभावित हो चुका है।

छात्रों की शिकायतों से शुरू हुआ विवाद

13 मई को 12वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों ने प्राप्त अंकों को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थीं। इस वर्ष पहली बार उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑन स्क्रीन मार्किंग प्रणाली के माध्यम से किया गया था। दिल्ली के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने फिजिक्स विषय में प्राप्त अंकों पर सवाल उठाते हुए पुनर्मूल्यांकन की मांग की थी। जांच में मूल्यांकन संबंधी त्रुटियां सामने आने पर बोर्ड को अपनी गलती स्वीकार करनी पड़ी। छात्र से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी पड़ी। इसके बाद OSM प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर व्यापक बहस शुरू हो गई। जिसने अब प्रशासनिक कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच का रूप ले लिया है।

नव्य जागरण

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