फायर एनओसी के बिना चल रहा था होटल: 21 की मौत; मरने वालों में 11 विदेशी शामिल, होटल मालिक अरेस्ट

दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली। मृतकों में 11 विदेशी नागरिक और 10 भारतीय शामिल हैं। विदेशियों में नौ अफ्रीकी देशों और दो तुर्कमेनिस्तान के नागरिक बताए गए हैं। हादसे के बाद बॉडी की शिनाख्त में कठिनाई आने के कारण कई मामलों में डीएनए परीक्षण कराया जाएगा। पुलिस ने होटल मालिक लवकेश बजाज को अरेस्ट कर लिया है। उसके खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि होटल के पास वैध फायर एनओसी नहीं थी। भवन को केवल छह कमरों के संचालन की अनुमति मिली थी। पांच मंजिला इमारत में 25 से अधिक कमरे विकसित कर दिए गए थे। आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है।
जानकारी के अनुसार सुबह करीब साढ़े आठ बजे होटल में आग लगी। शुरुआती चंद मिनटों में ही धुआं पूरी इमारत में फैल गया। ऊपरी मंजिलों पर ठहरे लोगों को बाहर निकलने का अवसर तक नहीं मिल सका। आग और धुएं के बीच फंसे लोग मदद के लिए पुकारते रहे। सूचना मिलने पर फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। इस दौरान 58 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। हादसे में 35 लोग घायल हुए हैं। बचाव अभियान के दौरान 10 पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गए। मैक्स अस्पताल प्रशासन के अनुसार कुल 39 लोगों को अस्पताल लाया गया था। इनमें से 18 लोगों की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी। वर्तमान में 15 मरीज आईसीयू में भर्ती हैं। जिनमें आठ को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सकों के अनुसार कई घायलों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
बड़ी लापरवाहियों ने बढ़ाई त्रासदी
जांच में सामने आया है कि होटल में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई थी। भवन की खिड़कियां बंद थीं। पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं थी। प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता था। बाहरी फायर एस्केप की कोई व्यवस्था मौजूद नहीं थी। एक्सपर्ट्स के अनुसार इस तरह की संरचना आग लगने की स्थिति में चिमनी की तरह काम करती है। जहां धुआं और गर्मी कुछ ही सेकंड में पूरी इमारत में फैल जाते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि आग लगने के दौरान सेंसर आधारित मुख्य गेट बंद हो गया था। जिससे लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया। इसके अलावा भवन में अवैध निर्माण और आंतरिक बदलाव भी किए गए थे। छह कमरों की अनुमति वाले भवन में 25 से अधिक कमरे विकसित कर दिए गए थे। स्मोक डिटेक्टर,फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम जैसे अनिवार्य सुरक्षा उपकरण या तो काम नहीं कर रहे थे या पूरी तरह निष्क्रिय थे। जांच में यह भी सामने आया है कि ग्राउंड फ्लोर पर कई भारी एलपीजी सिलेंडर रखे गए थे। जिनके लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध नहीं थी।
बेसमेंट में फंसे लोगों को ग्रिल काटकर निकाला गया
अधिकारियों के अनुसार भवन के ग्राउंड फ्लोर पर रेस्टोरेंट संचालित किया जा रहा था। बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों का उपयोग होटल के रूप में हो रहा था। आग लगने के बाद कई लोग बेसमेंट में फंस गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि बेसमेंट का दरवाजा बंद था। उसे खोलने में दमकलकर्मियों को 20 मिनट से अधिक समय लग गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बचाव दल ने ग्रिल काटकर लोगों को बाहर निकाला। इसके बाद घायलों को एंबुलेंस के माध्यम से विभिन्न अस्पतालों में पहुंचाया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि बचाव अभियान में थोड़ी और देरी होती तो मृतकों की संख्या और अधिक हो सकती थी।
बंद खिड़कियां और सेंसर गेट बने मौत का जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार पांच मंजिला होटल में अंदर आने और बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था। खिड़कियां सील कर दी गई थीं और मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर आधारित था। आग लगने के बाद यही व्यवस्थाएं लोगों के लिए मौत का जाल साबित हुईं। धुआं इतनी तेजी से फैला कि कई लोगों को संभलने या बाहर निकलने का अवसर ही नहीं मिला। कुछ मेहमान उस समय गहरी नींद में थे। उन्हें स्थिति की जानकारी तब हुई जब पूरा परिसर धुएं से भर चुका था। साकेत स्थित अस्पतालों में अपने परिजनों की तलाश में पहुंचे लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। कई बॉडी इस कदर झुलस चुकी थी कि तस्वीरों के आधार पर उनकी पहचान करना भी मुश्किल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि कई बॉडी की पहचान डीएनए परीक्षण के जरिए कराई जाएगी।
लोगों ने सुनाई भयावह रात की कहानी
होटल के सामने रहने वाली युवती ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे उन्होंने दमकल विभाग को फोन किया था। लेकिन राहत दल को पहुंचने में समय लगा। पार्क में टहल रहे युवक ने बताया कि धुएं का गुबार देखकर वे तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और लोगों की मदद से वहां से गुजर रही एंबुलेंस को रोककर घायलों को अस्पताल भिजवाया। स्थानीय निवासी के अनुसार कई धमाकों की आवाज से पूरे इलाके में दहशत फैल गई थी। आसपास रहने वाले लोग अपनी जान की परवाह किए बिना होटल की ओर दौड़ पड़े और बचाव कार्य में जुट गए। हौजरानी गांव के निवासी ने बताया कि अधिकांश लोग धुएं की वजह से बेहोश हो चुके थे। स्थानीय लोगों ने तत्काल सीपीआर देना शुरू किया। जिससे कई लोगों की जान बचाई जा सकी। वहीं होटल के समीप रहने वाले लोगों ने बताया कि जब वह नींद से जागे तो होटल से धुआं निकल रहा था। कई लोग खिड़कियों तथा बालकनियों से लटककर मदद की गुहार लगा रहे थे।
गद्दे बिछाकर बचाईं जानें
फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले स्थानीय लोग राहत अभियान में जुट गए थे। होटल के सामने कंबल और गद्दों की दुकान चलाने वाले युवक ने अपनी दुकान के सभी नए गद्दे और रजाइयां सड़क पर बिछा दीं। ऊपरी मंजिलों से कूदने वाले कई लोग इन्हीं गद्दों पर गिरे। जिससे उनकी जान बच सकी। स्थानीय युवकों ने भी लगातार लोगों को बाहर निकालने में लगे रहे। इन युवकों ने कम से कम 10 लोगों को मौके पर सीपीआर देकर उनकी सांसें वापस लाने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों की तत्परता को राहत अभियान की सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।
होटल मालिक बोला- संचालन किसी और के जिम्मे था
गिरफ्तार होटल मालिक लवकेश बजाज ने पूछताछ में दावा किया कि वह स्वयं होटल का संचालन नहीं देखता था। उसके अनुसार होटल के प्रबंधन, बिलिंग और अकाउंट्स का काम किसी अन्य व्यक्ति के जिम्मे था। उसने यह भी कहा कि होटल में कमरे बढ़ाने और अन्य निर्माण संबंधी बदलावों की सलाह भी उसी व्यक्ति ने दी थी। बजाज का कहना है कि उसे बताया गया था कि इस तरह के मॉडिफिकेशन सामान्य हैं। दिल्ली में अधिकांश होटल इसी प्रकार संचालित होते हैं। हालांकि जांच एजेंसियां उसके दावों की सत्यता की पड़ताल कर रही हैं।
हाई कोर्ट ने पांच महीने पहले मांगा था एक्शन प्लान
दिल्ली हाई कोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में दावा किया गया था। राजधानी में करीब एक हजार लाइसेंसी होटल और गेस्ट हाउस संचालित हैं। उनमें से केवल 52 के पास वैध फायर एनओसी है। इसी वर्ष सात जनवरी को हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार, एमसीडी और एनडीएमसी को फायर सेफ्टी को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता अधिवक्ता ने अदालत को बताया था कि बड़ी संख्या में होटल और गेस्ट हाउस आवश्यक अग्नि सुरक्षा मानकों के बिना संचालित हो रहे हैं। अदालत की टिप्पणी और निर्देशों के करीब पांच महीने बाद यह भीषण हादसा सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार जिस होटल में आग लगी, उसके पास भवन का स्वीकृत नक्शा तक उपलब्ध नहीं था। अब जांच एजेंसियां पूरे मामले में प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर हुई लापरवाहियों की भी पड़ताल कर रही हैं।
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