होर्मुज संकट के बीच भारत-वेनेजुएला का बड़ा कदम: पीएम मोदी ने की डेल्सी रोड्रिगेज से मुलाकात, भारत सुरक्षित करेगा अपनी एनर्जी सप्लाई

वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े संकट के बीच भारत और वेनेजुएला के संबंधों में नई गति देखने को मिल रही है। इसी क्रम में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की आपूर्ति, निवेश और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को लेकर व्यापक चर्चा हुई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक आपूर्तिकर्ताओं के साथ-साथ नए और भरोसेमंद विकल्पों की तलाश कर रहा है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात से पहले डेल्सी रोड्रिगेज ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी बातचीत की। जयशंकर ने कहा कि भारत और वेनेजुएला के संबंधों को मजबूत करने में रोड्रिगेज की लंबे समय से महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी और रोड्रिगेज के बीच हुई चर्चा दोनों देशों के रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगी। माना जा रहा है कि आगामी महीनों में ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण समझौते सामने आ सकते हैं।
भारत के लिए अहम बनता जा रहा है वेनेजुएला
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि वेनेजुएला एक बार फिर भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में तेजी से उभर रहा है। इंटरनेशनल ऊर्जा विश्लेषण एजेंसी केप्लर के अनुसार मई 2026 में भारत को वेनेजुएला से होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति में अप्रैल की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस वृद्धि के साथ वेनेजुएला ने सऊदी अरब और अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए भारत के प्रमुख तेल सप्लायरों में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। वर्तमान में केवल रूस और संयुक्त अरब अमीरात ही भारत को उससे अधिक तेल की आपूर्ति कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर उसके संभावित प्रभाव को देखते हुए भारत वैकल्पिक स्रोतों को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ऐसे में वेनेजुएला का विशाल तेल भंडार और उसकी बढ़ती आपूर्ति भारत के लिए महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार, भारत के लिए अवसर
करीब 303 अरब बैरल के अनुमानित भंडार के साथ वेनेजुएला को दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार कई प्रमुख तेल उत्पादक देशों से भी अधिक है। यही कारण है कि इंटरनेशनल ऊर्जा बाजार में वेनेजुएला की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण वेनेजुएला के तेल निर्यात को झटका लगा था। अब परिस्थितियों में बदलाव के साथ वहां से तेल आपूर्ति दोबारा बढ़ने लगी है। भारत की आधुनिक रिफाइनरियां भारी और उच्च सल्फर युक्त कच्चे तेल को परिष्कृत करने में सक्षम हैं। वेनेजुएलाई तेल अपेक्षाकृत सस्ता होने के कारण भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों के लिए आर्थिक रूप से भी लाभदायक माना जाता है। यही वजह है कि भारतीय ऊर्जा कंपनियां इस तेल को अपने दीर्घकालिक ऊर्जा पोर्टफोलियो का हिस्सा बनाने में रुचि दिखा रही हैं।
निवेश और रणनीतिक साझेदारी पर भी फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार वेनेजुएला भारत का एक महत्वपूर्ण ऊर्जा साझेदार है। भारतीय सरकारी तेल कंपनियों का वहां पहले से निवेश मौजूद है। दोनों देशों के बीच तेल उत्पादन, रिफाइनिंग, ऊर्जा अवसंरचना और निवेश के नए अवसरों पर भी चर्चा जारी है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में भारतीय कंपनियां वेनेजुएला के ऊर्जा क्षेत्र में अपनी भागीदारी और बढ़ा सकती हैं। उल्लेखनीय है कि डेल्सी रोड्रिगेज इससे पहले भी कई बार भारत आ चुकी हैं। फरवरी 2025 में उन्होंने उपराष्ट्रपति और तेल मंत्री के रूप में ‘इंडिया एनर्जी वीक’ में हिस्सा लिया था। उस दौरान भी दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को विस्तार देने पर सहमति बनी थी। अब कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में उनकी यह यात्रा भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
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