बांके बिहारी मंदिर में भीड़ नियंत्रण पर SC सख्त: ‘धार्मिक परंपराएं रहें बरकरार, श्रद्धालुओं का नहीं होना चाहिए शोषण’

नई दिल्ली|55 मिनट पहले
‘धार्मिक परंपराएं रहें बरकरार, श्रद्धालुओं का नहीं होना चाहिए शोषण’

वृंदावन स्थित बांके बिहारी मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, संकरे रास्तों और मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को व्यापक विकास योजना तैयार करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मंदिर की धार्मिक परंपराएं और आस्था अक्षुण्ण रहनी चाहिए। इसके नाम पर किसी प्रकार की अव्यवस्था या श्रद्धालुओं का शोषण स्वीकार नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने राज्य सरकार से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास की योजना बनाकर पेश करने को कहा है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बाग्ची की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि बांके बिहारी मंदिर में हर दिन भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहां तक जाने वाले रास्ते बेहद संकरे हैं और सुविधाएं भी अपर्याप्त हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक भीड़ प्रबंधन प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है। अदालत ने सुझाव दिया कि श्रद्धालुओं को अलग-अलग समूहों में दर्शन के लिए भेजा जाए। एक समूह के लौटने के बाद दूसरे समूह को प्रवेश दिया जाए।

विकास योजना में हों आधुनिक सुविधाएं

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि प्रस्तावित विकास योजना में सड़कों का चौड़ीकरण, अस्पताल, विश्राम स्थल, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, महिलाओं और बच्चों के लिए अलग सुविधाएं, आपातकालीन निकास मार्ग तथा सीनियर सिटीजन, दिव्यांगों और बीमार श्रद्धालुओं के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था शामिल की जाए। अदालत ने कहा कि पूरे क्षेत्र के सुनियोजित विकास के लिए एक विशेष मास्टर प्लान तैयार किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी माना कि मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों को व्यवस्थित करना आवश्यक होगा। इसके लिए कुछ स्थानों पर जमीन अधिग्रहण की जरूरत भी पड़ सकती है। कोर्ट ने कहा कि श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों दोनों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए संतुलित विकास होना चाहिए।

धार्मिक परंपराओं पर भी कोर्ट की नजर

मामले की सुनवाई के दौरान गोस्वामी समाज की ओर से सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान और अन्य वकीलों ने मंदिर की पारंपरिक व्यवस्थाओं में बदलाव पर आपत्ति जताई है। उनका कहना था कि देहरी पूजन जैसी सदियों पुरानी परंपरा को बदल दिया गया है और मंदिर के समय में भी बदलाव किया गया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बांके बिहारी मंदिर की धार्मिक मान्यताएं अन्य मंदिरों से अलग हैं। क्योंकि यहां भगवान को जीवंत बाल स्वरूप में पूजा जाता है। गोस्वामियों ने कहा कि मान्यता है कि भगवान रात में निधिवन लीला के लिए जाते हैं, इसलिए सुबह विश्राम करते हैं। इसी कारण मंदिर में मंगला आरती नहीं होती। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि परंपराओं से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।

उच्च स्तरीय समिति में शामिल किए गए गोस्वामी प्रतिनिधि

सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामियों की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए उच्च स्तरीय समिति में उनके प्रतिनिधियों को शामिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने शयन भोग और राज भोग से जुड़े दो-दो गोस्वामियों को समिति का सदस्य नामित किया है। ये प्रतिनिधि मंदिर की धार्मिक परंपराओं, पूजा पद्धति और व्यवस्थाओं को लेकर समिति को सुझाव देंगे, जिन पर विचार किया जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक परंपराएं बरकरार रहनी चाहिए। साथ ही भीड़ प्रबंधन के लिए आधुनिक तकनीकों और नई सोच को अपनाना जरूरी है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि मंदिर के समय और अन्य व्यवस्थाओं पर भी समिति विचार कर सकती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सबसे अहम

सुनवाई के दौरान फूल बंगला सेवा, लाइव दर्शन स्ट्रीमिंग और सेवा शुल्क जैसे मुद्दे भी उठाए गए है। गोस्वामियों ने कुछ सेवाओं के लिए भारी शुल्क लगाए जाने पर भी सवाल खड़े किए हैं। वहीं समिति की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कोर्ट को बताया कि मंदिर के समय और व्यवस्थाओं में बदलाव श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किए गए हैं।

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