यूपी में छह माह बढ़ा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल: अब प्रशासक बनकर संभालेंगे जिम्मेदारी, 26 मई तक की थी समय सीमा

उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रफ्तार बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें अगले छह महीने तक प्रशासक के रूप में काम करने की मंजूरी दे दी है। पंचायती राज विभाग की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया गया। इसके साथ ही बुधवार से प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों में निवर्तमान प्रधान प्रशासक की भूमिका में कार्य करेंगे। सरकार के इस फैसले से गांवों में चल रहे विकास कार्यों, सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, मनरेगा योजनाओं और सड़क मरम्मत जैसे जरूरी काम प्रभावित नहीं होंगे।
पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर के निर्देश पर प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार ने आदेश जारी किया। सरकार ने यह कदम पंचायत चुनाव में संभावित देरी को देखते हुए उठाया है। दरअसल, राज्य में पिछड़ा वर्ग आरक्षण की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसके लिए गठित समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग को जिलावार आंकड़े जुटाकर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है। माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया में अभी लंबा समय लग सकता है, जिसके चलते पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनावों के बाद कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
पहली बार प्रधानों को ही बनाया गया प्रशासक
अब तक ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने पर संबंधित क्षेत्र के एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त करने की परंपरा रही है। हालांकि इस बार सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ही प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क है कि इससे गांवों में कामकाज की निरंतरता बनी रहेगी और विकास योजनाओं पर असर नहीं पड़ेगा। राष्ट्रीय पंचायत राज्य ग्राम प्रधान संघ भी लंबे समय से ऐसी मांग कर रहा था। आदेश के मुताबिक मंगलवार को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिलाधिकारी उन्हें औपचारिक रूप से प्रशासक नामित करेंगे। हालांकि इन प्रशासकों के अधिकार सीमित रहेंगे। वे केवल सामान्य और नियमित कार्यों का संचालन कर सकेंगे। किसी भी बड़े वित्तीय या नीतिगत फैसले के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
जुलाई में क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायतों का भी कार्यकाल समाप्त
राज्य सरकार के सामने आने वाले महीनों में पंचायत व्यवस्था को लेकर और भी प्रशासनिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। प्रदेश में क्षेत्र पंचायतों का कार्यकाल 19 जुलाई और जिला पंचायतों का कार्यकाल 11 जुलाई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि इन संस्थाओं में भी प्रशासकों की नियुक्ति की जा सकती है। प्रशासनिक स्तर पर इसकी तैयारियां शुरू होने की चर्चा है।
आरक्षण प्रक्रिया में लग सकता है लंबा समय
राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग विभिन्न जिलों में जाकर आबादी के आंकड़े जुटाएगा और उसी आधार पर पंचायत सीटों का आरक्षण तय होगा। नियमों के अनुसार किसी भी ब्लॉक में ओबीसी आबादी 27 प्रतिशत से अधिक होने पर भी आरक्षण की सीमा 27 प्रतिशत ही रहेगी। यदि आबादी इससे कम होगी तो उसी अनुपात में सीटें आरक्षित की जाएंगी। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रक्रिया को पूरा करने में अभी कई महीने लग सकते हैं। सरकार के इस फैसले को गांवों में प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने और विकास योजनाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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