महोबा के ऐतिहासिक किले में तोप चोरी की साजिश नाकाम: गोरखपुर का आरोपी रंगे हाथ अरेस्ट, कई दिनों से चल रही थी तैयारी

उत्तरप्रदेश|1 घंटा पहले
गोरखपुर का आरोपी रंगे हाथ अरेस्ट, कई दिनों से चल रही थी तैयारी

महोबा जिले में स्थित ऐतिहासिक मंगलगढ़ किले से रियासतकालीन अष्टधातु की तोप चोरी करने की बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। चरखारी कस्बे के इस प्राचीन किले में एक युवक को भारी-भरकम तोप काटते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। आरोपी कई दिनों से किले के भीतर छिपकर रह रहा था और सुनियोजित तरीके से ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने में लगा था। नगर पालिका कर्मचारियों की सतर्कता और स्थानीय कर्मियों की मुस्तैदी से यह चोरी होने से पहले ही नाकाम कर दी गई।

जानकारी के मुताबिक आरोपी आरी ब्लेड और अन्य धारदार औजारों की मदद से अष्टधातु की प्राचीन तोप को धीरे-धीरे काट रहा था। उसने तोप का एक हिस्सा काटकर अलग भी कर दिया था। पुलिस को आशंका है कि आरोपी का इरादा तोप को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर तस्करी करने का था, ताकि ऐतिहासिक धरोहर को कबाड़ या प्राचीन धातु के रूप में बेचा जा सके। किले में तैनात कर्मचारियों को जब संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत नगर पालिका प्रशासन को सूचित किया। सूचना मिलते ही नगर पालिका के लिपिक संजीत कुमार समेत कई कर्मचारी मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने आरोपी को पकड़ने के लिए घेराबंदी की और गमछे की मदद से उसे काबू में कर लिया। इसके बाद आरोपी को चरखारी कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया।

आरोपी के पास से मिले औजार और पहचान पत्र

तलाशी के दौरान आरोपी के पास से तोप काटने में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड, औजार और एक आधार कार्ड बरामद हुआ। आधार कार्ड के जरिए उसकी पहचान गोरखपुर जिले के खैरखुटा गांव निवासी रजनीकांत मिश्र पुत्र विवेकानंद मिश्र के रूप में हुई। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी कई दिनों से किले के भीतर ही छिपकर रह रहा था और रात के समय चोरी की वारदात को अंजाम देने की कोशिश करता था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी से पूछताछ की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह अकेले इस वारदात में शामिल था या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है।

ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा पर उठे सवाल

मंगलगढ़ किला चरखारी रियासत के इतिहास और विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। यहां मौजूद अष्टधातु की तोपें ऐतिहासिक महत्व रखती हैं। ऐसे में इस घटना ने किले की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते आरोपी पकड़ा नहीं जाता तो ऐतिहासिक धरोहर को भारी नुकसान पहुंच सकता था।

प्रशासन ने किले की निगरानी बढ़ाने के दिए निर्देश

नगर पालिका प्रशासन ने घटना के बाद किले की सुरक्षा और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस ने आरोपी के खिलाफ गंभीर धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का कहना है कि ऐतिहासिक धरोहरों से छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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