रामपुर कोर्ट का बड़ा फैसला: आजम-अब्दुल्ला को फर्जी पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा, सरकार की अपील पर बढ़ी सजा

उत्तरप्रदेश|1 घंटा पहले
आजम-अब्दुल्ला को फर्जी पैन कार्ड मामले में 10 साल की सजा, सरकार की अपील पर बढ़ी सजा

समाजवादी पार्टी के सीनियर लीडर आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान की कानूनी परेशानियां एक बार फिर बढ़ गई हैं। रामपुर की MP/MLA कोर्ट ने फर्जी पैन कार्ड मामले में दोनों की सजा तीन-तीन साल बढ़ाते हुए अब कुल 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर पांच-पांच लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इससे पहले नवंबर 2025 में इसी मामले में दोनों को सात-सात साल की सजा सुनाई गई थी। अदालत के ताजा फैसले के बाद सपा खेमे में हलचल तेज हो गई है, जबकि भाजपा नेताओं ने इसे कानून की बड़ी जीत बताया है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एडीजीसी सीमा राणा ने अदालत में सजा बढ़ाने की अपील दायर की थी। सरकार का तर्क था कि मामला सिर्फ दस्तावेजी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि सरकारी पहचान पत्रों के दुरुपयोग और योजनाबद्ध फर्जीवाड़े से जुड़ा गंभीर अपराध है। अभियोजन पक्ष ने अदालत से दोनों आरोपियों को उम्रकैद देने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने उम्रकैद की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन सजा में तीन-तीन साल की बढ़ोतरी कर दी। फैसले के बाद सरकारी वकील सीमा राणा ने कहा कि अदालत ने अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस फैसले से संतुष्ट है और यह संदेश देता है कि पहचान पत्रों के दुरुपयोग जैसे मामलों में कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।

भाजपा विधायक बोले- ऐतिहासिक फैसला

इस मामले की शुरुआत 2019 में हुई थी, जब रामपुर से भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड बनवाए और अलग-अलग दस्तावेजों में अलग जन्मतिथि का इस्तेमाल किया। जांच के दौरान पुलिस ने आजम खान का नाम भी केस में शामिल किया। फैसले के बाद आकाश सक्सेना ने कहा कि देश में पहली बार ऐसे मामले में सजा बढ़ाई गई है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए कहा कि उन्होंने अदालत से अधिकतम सजा की मांग की थी और अब न्यायिक प्रक्रिया ने स्पष्ट संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।

चुनाव लड़ाने के लिए बदली गई जन्मतिथि

मामले की जड़ 2017 विधानसभा चुनाव से जुड़ी है। उस समय आजम खान चाहते थे कि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर की स्वार सीट से चुनाव लड़ें। लेकिन आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उनकी उम्र चुनाव लड़ने के लिए तय सीमा से कम थी। आरोप है कि इसके बाद प्रभाव का इस्तेमाल कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया गया, जिसमें जन्म वर्ष बदल दिया गया। इसी दस्तावेज के आधार पर पैन कार्ड और अन्य पहचान पत्र बनवाए गए। बाद में इस पूरे मामले का खुलासा हुआ और अदालत ने अब्दुल्ला आजम का निर्वाचन रद्द कर दिया। उनकी विधानसभा सदस्यता भी चली गई। हालांकि 2022 में वह दोबारा चुनाव जीतने में सफल रहे, लेकिन दूसरे मामलों में सजा होने के कारण उनकी सदस्यता फिर समाप्त हो गई।

लगातार बढ़ रही हैं कानूनी मुश्किलें

आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ पहले से कई मामले अदालतों में लंबित हैं। हाल ही में एक अन्य मामले में अदालत ने आजम खान को दो साल की सजा सुनाई थी। ताजा फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि आने वाले समय में उनके लिए कानूनी और राजनीतिक चुनौतियां और कठिन हो सकती हैं। वहीं विपक्षी दल इस फैसले को राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़े के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है।

नव्य जागरण

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