यूपी में बड़े प्रशासनिक फेरबदल: नौ आईपीएस अफसरों के तबादले, आलोक सिंह पीएसी में बनाए गए डीजी

उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार को प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर आईपीएस अधिकारियों के तबादले किए। सरकार ने एक साथ नौ सीनियर आईपीएस अफसरों की नई तैनाती करते हुए कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। इस फेरबदल में कानपुर, आगरा, ट्रैफिक, अपराध शाखा, होमगार्ड, ईओडब्ल्यू और पीएसी जैसे अहम विभाग शामिल हैं। तबादलों को आगामी प्रशासनिक रणनीति और कानून-व्यवस्था के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सबसे चर्चित बदलाव कानपुर जोन में देखने को मिला, जहां लंबे समय से तैनात एडीजी आलोक सिंह को प्रमोशन के बाद पीएसी में डीजी पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। उनकी जगह आगरा जोन की एडीजी अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है। माना जा रहा है कि सरकार आगामी समय में औद्योगिक शहरों और संवेदनशील जिलों में कानून-व्यवस्था को लेकर विशेष रणनीति पर काम कर रही है। इसी वजह से अनुभवी अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं।
आलोक सिंह को नहीं मिली मनचाही पोस्टिंग
आईपीएस आलोक सिंह को हाल ही में डीजी रैंक में प्रमोशन मिला था। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा थी कि वह लखनऊ में किसी महत्वपूर्ण विभाग, विशेषकर इंटेलिजेंस में पोस्टिंग चाहते थे, ताकि सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय से समन्वय बना सकें। हालांकि सरकार ने उन्हें पीएसी में तैनाती देते हुए विशेष सुरक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी। आलोक सिंह इससे पहले कानपुर में एसएसपी, आईजी और एडीजी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं और उन्हें तेजतर्रार अधिकारियों में गिना जाता है। वहीं, 1996 बैच के आईपीएस ए. सतीश गणेश को ट्रैफिक एवं सड़क सुरक्षा निदेशालय के साथ-साथ एडीजी क्राइम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। सरकार ने अपराध नियंत्रण और ट्रैफिक प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। दूसरी ओर एडीजी अपराध रहे एसके भगत को आगरा जोन का नया एडीजी नियुक्त किया गया है। माना जा रहा है कि पर्यटन और संवेदनशील जिलों वाले आगरा जोन में अपराध नियंत्रण को लेकर सरकार विशेष फोकस करना चाहती है।
कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी
सरकार ने इस फेरबदल में कई अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी है। डीके ठाकुर को डीजी होमगार्ड बनाया गया है, जबकि उनके पास नागरिक सुरक्षा विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी रहेगी। वहीं विनोद कुमार सिंह, जो पहले से सीआईडी और साइबर क्राइम की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उन्हें अब यूपी-112 की भी कमान सौंप दी गई है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि सरकार अनुभवी और भरोसेमंद अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा जता रही है। आरके स्वर्णकार को पीएसी से हटाकर पावर कॉर्पोरेशन का डीजी बनाया गया है। वहीं जय नारायण सिंह को यूपी पावर कॉर्पोरेशन से हटाकर आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) लखनऊ भेजा गया है। 2007 बैच की आईपीएस अधिकारी गीता सिंह को अभियोजन विभाग से हटाकर प्रशिक्षण निदेशालय लखनऊ में नई जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा फेरबदल
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह तबादला सिर्फ नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सरकार की आगामी रणनीति का हिस्सा है। कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध, महिला सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर सरकार अब अधिक आक्रामक और परिणाम आधारित व्यवस्था लागू करना चाहती है। ऐसे में वरिष्ठ अधिकारियों की नई तैनाती को उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
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