विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना ने पकड़ी रफ्तार: ड्रोन सर्वे शुरू; चार राज्यों से जुड़ेगा यूपी

वाराणसी|8 घंटे पहले
ड्रोन सर्वे शुरू; चार राज्यों से जुड़ेगा यूपी

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की महत्वाकांक्षी विंध्य एक्सप्रेसवे परियोजना अब तेजी से जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। प्रयागराज से सोनभद्र तक प्रस्तावित लगभग 330 किलोमीटर लंबे सिक्सलेन एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए आधुनिक ड्रोन और सैटेलाइट आधारित एरियल सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। प्रदेश सरकार इस परियोजना को पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदलने वाली बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर पहल के रूप में देख रही है। परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने हेतु चयनित तकनीकी एजेंसियों और कंसल्टेंट कंपनियों के साथ अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।

यूपीडा की ओर से चयनित चेन्नई की तकनीकी एजेंसियां अत्याधुनिक ड्रोन, जीपीएस डिवाइस और सैटेलाइट मैपिंग तकनीक के जरिए पूरे प्रस्तावित रूट का थ्रीडी सर्वे और स्थलाकृतिक अध्ययन कर रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक अगले दो महीनों में डीपीआर तैयार कर ली जाएगी, जिसके बाद निर्माण कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। एक्सप्रेसवे प्रयागराज की सोरांव तहसील के जूड़ापुर दांदू गांव से शुरू होगा, जहां से गंगा एक्सप्रेसवे भी गुजर रहा है। इसके बाद यह मीरजापुर, वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र की छत्तीसगढ़ सीमा स्थित परसा टोला तक पहुंचेगा।

कई बड़े एक्सप्रेसवे और हाईवे से होगा लिंक

परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मल्टी-कनेक्टिविटी मानी जा रही है। विंध्य एक्सप्रेसवे को प्रयागराज में दिल्ली-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग से जोड़ा जाएगा, जबकि सोरांव क्षेत्र में यह सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से कनेक्ट होगा। इसके अलावा गाजीपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने के लिए एक अलग स्पर लिंक भी विकसित किया जा रहा है। इससे पूर्वी उत्तर प्रदेश में माल परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

चार राज्यों के बीच मजबूत होगी कनेक्टिविटी

विंध्य एक्सप्रेसवे केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित परियोजना नहीं होगा, बल्कि यह प्रदेश को मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर बनेगा। इसके निर्माण से दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से विंध्य क्षेत्र तक यात्रा समय में बड़ी कमी आएगी। साथ ही धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। लोगों का कहना है कि इससे औद्योगिक निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज

प्रयागराज की सोरांव, फूलपुर और हंडिया तहसीलों के कुल 84 गांवों को भूमि अधिग्रहण के लिए चिन्हित किया गया है। कंसल्टेंट कंपनी ने भूमि अध्याप्ति अधिकारी और एडीएम नमामि गंगे संजीव शाक्य के साथ बैठक कर संबंधित गांवों के नक्शे और राजस्व अभिलेख जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार किसानों और ग्रामीणों से समन्वय स्थापित कर पारदर्शी तरीके से भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है। प्रदेश सरकार इस परियोजना को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग भी कर रही है।

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