जैश-ए-मोहम्मद का खतरनाक मॉड्यूल बेनकाब: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को निशाना बनाने की साजिश, बंगाल STF का दावा-पुलिस की वर्दी में घुसपैठ की तैयारी

पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक संदिग्ध मॉड्यूल का खुलासा करते हुए दावा किया है कि गिरफ्तार आरोपी हमीम मंडल दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित एक प्रदर्शन में पुलिस की वर्दी पहनकर घुसपैठ और तोड़फोड़ की साजिश रच रहा था। एसटीएफ के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था और उनके निर्देश पर संवेदनशील सूचनाएं जुटाने के साथ कई प्रमुख राजनीतिक हस्तियों और पुलिस अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। मामले में उसकी कथित सहयोगी अर्पिता सरकार को भी अरेस्ट किया गया है।
एसटीएफ के आईजी गौरव शर्मा ने बताया कि हमीम मंडल के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया खातों की जांच में व्हाट्सएप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान स्थित संपर्कों से बातचीत के कथित साक्ष्य मिले हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपी एन्क्रिप्टेड चैट और विदेशी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क में रहता था। इन हैंडलर्स के कोडनेम राणा, अबीर, हबीब और 333 बताए गए हैं। आरोपियों के पास से यूनाइटेड किंगडम और मेक्सिको में जारी इंटरनेशनल सिम कार्ड भी बरामद किए जाने का दावा किया गया है।
हनी ट्रैप और अपहरण की भी रची गई थी योजना
एसटीएफ के अनुसार, गिरफ्तार अर्पिता सरकार हमीम मंडल की सहयोगी और कथित गर्लफ्रेंड है। जांच में यह भी सामने आया कि दोनों ने मिलकर पश्चिम बंगाल सरकार के एक राज्य मंत्री के बेटे को हनी ट्रैप में फंसाने की साजिश रची थी। एजेंसी का दावा है कि इसके बाद अपहरण कर परिवार से फिरौती वसूलने की योजना बनाई गई थी। अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे षड्यंत्र के पीछे भी पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स की भूमिका होने की आशंका है। फिलहाल मामले में शामिल अन्य लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है।
मुख्यमंत्री समेत कई लोग थे निगरानी के दायरे में
एसटीएफ के मुताबिक, 23 वर्षीय हमीम मंडल पहले हावड़ा में काम करता था और विधानसभा चुनाव से पहले बर्धमान में किराये के मकान में रहने लगा था। पिछले दो-तीन महीनों से वह जांच एजेंसियों से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था। जांच में दावा किया गया है कि उसे पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री समेत कई नेताओं और पुलिस अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखने का जिम्मा सौंपा गया था। उसे ऐसे स्थानों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए थे। जहां मुख्यमंत्री अपेक्षाकृत कम सुरक्षा व्यवस्था में पहुंच सकते हों।
शिकायत से शुरू हुई जांच
एसटीएफ अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच उस समय शुरू हुई, जब एक राज्य मंत्री के परिवार से जुड़ी हनी ट्रैप और फिरौती की साजिश की सूचना मिली। जांच के दौरान एक सोशल मीडिया अकाउंट का पता चला, जिसे अर्पिता सरकार संचालित कर रही थी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए एजेंसी हमीम मंडल तक पहुंची। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क, उसके विदेशी संपर्कों और संभावित आतंकी गतिविधियों की गहन जांच की जा रही है। फिलहाल एजेंसियां सभी पहलुओं पर साक्ष्य जुटाने में लगी हैं।
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