ई-20 पेट्रोल पर सरकार का स्पष्ट जवाब: बीएस-3 गाड़ियों में बदलेंगे रबर पार्ट्स, राज्यसभा में सरकार ने रखा पक्ष

5 घंटे पहले
बीएस-3 गाड़ियों में बदलेंगे रबर पार्ट्स, राज्यसभा में सरकार ने रखा पक्ष

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब के जरिए कहा कि ई-20 पेट्रोल के उपयोग से वर्ष 2005 से 2016 के बीच बनी बीएस-3 मानक की कुछ पुरानी दोपहिया और चारपहिया गाड़ियों में रबर पार्ट्स और गैस्केट बदलने पड़ सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बदलाव सामान्य सर्विसिंग के दौरान आसानी से किया जा सकता है और इसके लिए इंजन में किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता नहीं है। सरकार की ओर से इस विषय पर पहली बार इस तरह की स्पष्ट जानकारी दी गई है।

गडकरी ने बताया कि इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) तथा ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से दोपहिया और चारपहिया वाहनों पर ई-20 ईंधन का अध्ययन किया गया है। अध्ययन में वाहन की समग्र कार्यक्षमता और टिकाऊपन पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव सामने नहीं आया।

रबर कंपोनेंट पर पड़ सकता है असर

सरकार के अनुसार, ई-20 पेट्रोल का असर मुख्य रूप से फ्यूल सिस्टम में लगे पुराने रबर कंपोनेंट पर पड़ सकता है। इनमें पाइप, ओ-रिंग, रबर सील, फ्यूल होज, गैस्केट, फ्यूल पंप के रबर हिस्से और इंजेक्टर सील शामिल हैं। समय के साथ एथेनॉल पुराने रबर को सख्त, मुलायम या फुला सकता है, क्योंकि पुराने वाहनों में उपयोग किए गए रबर एथेनॉल के लंबे संपर्क को ध्यान में रखकर तैयार नहीं किए गए थे। गडकरी ने यह भी कहा कि वाहन का माइलेज केवल ईंधन की गुणवत्ता पर निर्भर नहीं करता। ड्राइविंग शैली, सड़क की स्थिति, नियमित रखरखाव और अन्य तकनीकी कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने बताया कि ई-20 ईंधन का उपयोग दुनिया के कई देशों में लंबे समय से किया जा रहा है।

इंजन बदलने की नहीं होगी जरूरत

सरकार के मुताबिक, रबर पार्ट्स बदलने का कोई निश्चित समय या किलोमीटर निर्धारित नहीं है। नियमित सर्विसिंग के दौरान यदि घिसावट, रिसाव या खराबी दिखाई देती है तो संबंधित पार्ट्स बदले जाएंगे। इन पार्ट्स को बदलने का खर्च वाहन के मॉडल पर निर्भर करेगा। अनुमान के अनुसार दोपहिया वाहनों में यह खर्च करीब 500 से 1500 रुपये और चारपहिया वाहनों में लगभग दो हजार से आठ हजार रुपये तक हो सकता है। इससे इंजन बदलने की जरूरत नहीं होगी और वाहन के सामान्य संचालन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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