2030 तक दो करोड़ होगा गिग वर्कफोर्स: रोजगार का बड़ा जरिया बन रहा सेक्टर, वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बेहद कम

नई दिल्ली। देश में गिग और इंटरनेट आधारित रोजगार तेजी से विस्तार कर रहा है। अनुमान है कि वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या 1.7 करोड़ से बढ़कर 2.1 करोड़ तक पहुंच सकती है। हालांकि, रोजगार के इस तेजी से बढ़ते बाजार में महिलाओं की भागीदारी अब भी बेहद सीमित है। रेडसीर स्ट्रैटेजी की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में गिग वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी केवल एक फीसदी के करीब है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में देश में करीब 60 लाख मासिक सक्रिय गिग इंटरनेट वर्कर्स हैं। दशक के अंत तक कुल नए रोजगारों में करीब 70 फीसदी योगदान इसी सेक्टर का हो सकता है। गिग प्लेटफॉर्म पहली बार नौकरी करने वालों और बेरोजगार युवाओं के लिए भी बड़ा अवसर बनकर उभरे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 54 फीसदी लोग गिग प्लेटफॉर्म से जुड़ने से पहले किसी भी प्रकार के रोजगार में नहीं थे।
महिलाओं की भागीदारी में अब भी बड़ी चुनौती
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में गिग सेक्टर में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 0.5 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग एक फीसदी तक पहुंची है। इसके मुकाबले देश में कुल महिला श्रम भागीदारी दर करीब 28 फीसदी है। गिग सेक्टर में सबसे अधिक महिलाएं ब्यूटी और वेलनेस सेवाओं से जुड़ी हैं, जहां उनकी हिस्सेदारी 35 से 45 फीसदी के बीच है। वहीं फूड डिलीवरी जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी अभी भी एक फीसदी से कम बनी हुई है।
घरेलू सेवाओं में सबसे अधिक कमाई
आय के मामले में घरेलू सेवाएं सबसे आगे हैं। इस क्षेत्र में फुल-टाइम गिग वर्कर्स की शुद्ध मासिक आय 80 हजार रुपये तक दर्ज की गई। वहीं ड्राइवरों की औसत आय करीब 39 हजार रुपये और डिलीवरी वर्कर्स की आय 22 से 23 हजार रुपये प्रतिमाह रही। रिपोर्ट के अनुसार, फुल-टाइम गिग वर्कर्स की प्रति घंटा औसत कमाई 138 रुपये है, जबकि अन्य कर्मचारियों की औसत प्रति घंटा आय 54 रुपये रही। वर्ष 2030 तक राइड-हेलिंग सेक्टर में 1.2 से 1.4 करोड़, डिलीवरी सेवाओं में 50 से 70 लाख और होम सर्विसेज में दो से तीन लाख गिग वर्कर्स होने का अनुमान है।
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