रेपो रेट बढ़ने के संकेत से महंगी होगी ईएमआई: कच्चा तेल 123 डॉलर पहुंचने का अनुमान, अक्टूबर में पहली बढ़ोतरी का अनुमान

आने वाले महीनों में होम लोन, कार लोन और अन्य फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज की ईएमआई बढ़ सकती है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रिसर्च रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) अक्टूबर और दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। इस तरह दिसंबर तक रेपो रेट में कुल 0.50 प्रतिशत तक इजाफा संभव है। रिपोर्ट में इसकी प्रमुख वजह देश में बढ़ता महंगाई दबाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी को बताया गया है।
एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, आरबीआई अक्टूबर की क्रेडिट पॉलिसी में रेपो रेट 0.25 प्रतिशत बढ़ा सकता है। इसके बाद दिसंबर में भी इतनी ही वृद्धि की संभावना जताई गई है। फिलहाल अगस्त में हुई मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक में केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। अगली एमपीसी बैठक 5 से 7 अक्टूबर के बीच प्रस्तावित है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना मजबूत है।
कच्चे तेल की तेजी से महंगाई का दबाव
एसबीआई ने रेपो रेट बढ़ाने की जरूरत के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों को अहम कारण माना है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले 15 दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। इसके आगे 105 से 123 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की आशंका जताई गई है। महंगे कच्चे तेल का असर पेट्रोल-डीजल से लेकर गैस, दवाइयों और इलेक्ट्रॉनिक्स के उत्पादन की लागत पर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, देश में जरूरी वस्तुओं की कीमतों का दबाव भी बढ़ा है। सीपीआई में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली जरूरी वस्तुओं की संख्या जनवरी 2026 में 22 थी, जो जुलाई तक बढ़कर 53 हो गई। एसबीआई का मानना है कि महंगाई के इस बढ़ते दायरे को नियंत्रित करने के लिए आरबीआई को ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर विचार करना चाहिए। यह फैसला अमेरिकी नीतियों के बजाय घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर लिया जा सकता है।
फ्लोटिंग लोन वालों की बढ़ेगी ईएमआई
रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर पड़ता है। बैंकिंग सिस्टम में ब्याज दर बढ़ने के बाद होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की लागत बढ़ सकती है। इससे मौजूदा ग्राहकों की ईएमआई बढ़ने की संभावना रहेगी। नए ग्राहकों को भी पहले के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर पर लोन मिल सकता है। हालांकि, फिक्स्ड रेट वाले लोन पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
एफडी कराने वालों को मिल सकता है फायदा
रेपो रेट बढ़ने का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। बैंक जमा पर ब्याज दरों में भी बढ़ोतरी कर सकते हैं। ऐसे में एफडी कराने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में बेहतर ब्याज मिलने की संभावना रहती है। दूसरी ओर, आरबीआई जब अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए रेपो रेट घटाता है तो बैंकों के लिए केंद्रीय बैंक से कर्ज लेना सस्ता हो जाता है। इसका फायदा ग्राहकों को कम ब्याज वाले लोन के रूप में मिलता है। वहीं, महंगाई बढ़ने पर दरें बढ़ाकर अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह कम करने की कोशिश की जाती है।










