आरबीआई की एमपीसी बैठक आज से शुरू: रेपो रेट में बदलाव के आसार कम, 5 अगस्त को होगा फैसलों का बड़ा ऐलान

57 मिनट पहले
रेपो रेट में बदलाव के आसार कम, 5 अगस्त को होगा फैसलों का बड़ा ऐलान

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई। बैठक के बाद पांच अगस्त को नीतिगत फैसलों की घोषणा की जाएगी। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई की मौजूदा स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए इस बार केंद्रीय बैंक रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और इसे मौजूदा स्तर पर बरकरार रख सकता है।

आरबीआई ने वर्ष 2025 के दौरान चार चरणों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती की थी। फरवरी 2025 में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटाकर 6.25 प्रतिशत किया गया था, जो करीब पांच वर्ष बाद पहली कटौती थी। इसके बाद अप्रैल में 0.25 प्रतिशत, जून में 0.50 प्रतिशत और दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की अतिरिक्त कटौती की गई, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ गया।

महंगाई और वैश्विक परिस्थितियों पर रहेगी नजर

रिजर्व बैंक की पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा जून में हुई थी। उस समय रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखा गया था, जबकि वर्ष 2027 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया गया था। मौजूदा वित्तीय वर्ष में कुल छह बैठकें प्रस्तावित हैं और यह तीसरी बैठक है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बावजूद आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव करने की जल्दबाजी नहीं करेगा। केंद्रीय बैंक का फोकस घरेलू महंगाई, बैंकिंग प्रणाली में तरलता और आर्थिक वृद्धि के बीच संतुलन बनाए रखने पर रहेगा।

दिसंबर में बढ़ोतरी की संभावना जता रहे एक्सपर्ट

इक्विरस सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और मौसम संबंधी चुनौतियों के कारण थोक और खुदरा महंगाई पर दबाव बना हुआ है। उनका अनुमान है कि पूरे वर्ष उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित महंगाई 4.9 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर सख्त होती मौद्रिक नीतियों को देखते हुए आरबीआई आगे भी सतर्क रुख अपनाएगा। संस्था का अनुमान है कि दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक 25 बेसिस पॉइंट तक रेपो रेट बढ़ाने पर विचार कर सकता है।

रेपो रेट का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक ऋण उपलब्ध कराता है। महंगाई बढ़ने पर आरबीआई आमतौर पर रेपो रेट बढ़ाता है, जिससे बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है और बाजार में धन का प्रवाह कम होता है। इसके विपरीत आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए रेपो रेट घटाया जाता है। इससे बैंकों को सस्ता ऋण मिलता है और ग्राहकों के लिए भी कर्ज लेना आसान हो जाता है।

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