अमेरिका ने ईरान में 7 घंटे बरसाए गोले: तेहरान ने किया करारा पलटवार, बहरीन-जॉर्डन के अमेरिकी ठिकानों पर किया हमला

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, लगातार चौथे दिन ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया गया। करीब सात घंटे तक चले ऑपरेशन में होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, नौसैनिक संसाधनों तथा तटीय रक्षा प्रणालियों को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
आईआरजीसी ने कहा कि उसके जवाबी अभियान के तहत बहरीन स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट बेस और जॉर्डन के अजराक एयरबेस को निशाना बनाया गया। इसके अलावा कुवैत में भी अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा किया गया है। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि तेहरान समझौते के लिए आगे नहीं आने पर अगले सप्ताह बिजलीघरों और प्रमुख पुलों को भी निशाना बनाया जा सकता है। वहीं, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अपनी रणनीति जारी रखेगा।
नाकेबंदी से पहले होर्मुज से निकले ईरानी जहाज
अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी लागू होने से पहले होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले 11 जहाजों में से नौ ईरानी मार्ग से निकले। शिप ट्रैकिंग फर्म केपलर के अनुसार, इनमें करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जा रहा एक सुपर टैंकर, रिफाइंड ऑयल से भरा एक टैंकर और एलपीजी लेकर जा रहे दो टैंकर शामिल थे। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक उसी दिन खाड़ी के अन्य तेल उत्पादक देशों से तेल या गैस लोड करने के लिए किसी टैंकर की गतिविधि दर्ज नहीं की गई।
पिकऐक्स माउंटेन परमाणु परिसर पर अमेरिका की नजर
राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि ईरान का पिकऐक्स माउंटेन न्यूक्लियर कॉम्प्लेक्स भी अमेरिकी निगरानी में है और जरूरत पड़ने पर उसे निशाना बनाया जा सकता है। यह परिसर नतांज परमाणु केंद्र के पास पहाड़ के भीतर बनाया गया है। माना जाता है कि इसकी सुरंगें लगभग 100 मीटर मोटी चट्टानों के नीचे स्थित हैं। ईरान का दावा है कि यहां अत्याधुनिक सेंट्रीफ्यूज तैयार किए जाते हैं। जबकि पश्चिमी देशों को आशंका है कि इसका उपयोग यूरेनियम संवर्धन या परमाणु कार्यक्रम की अन्य गतिविधियों के लिए भी किया जा सकता है।
गहराई के कारण चुनौतीपूर्ण माना जा रहा लक्ष्य
एक्सपर्ट्स के अनुसार यह ठिकाना इतनी गहराई में स्थित है कि अमेरिका का सबसे शक्तिशाली जीबीयू-57 बंकर बस्टर बम भी इसे पूरी तरह नष्ट करने में सक्षम नहीं माना जाता। यदि केवल सुरंगों के प्रवेश द्वारों को निशाना बनाया जाए, तो आवाजाही कुछ समय के लिए बाधित हो सकती है। लेकिन भीतर मौजूद संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त करना आसान नहीं होगा। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों में इस परिसर के आसपास निर्माण गतिविधियां और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के संकेत मिले हैं, जिससे अमेरिका को आशंका है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के महत्वपूर्ण हिस्सों को और अधिक सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर रहा है।
कतर स्थित अमेरिकी बेस को लेकर भी दावे
इस बीच कतर के अल-उदीद एयरबेस की सैटेलाइट तस्वीरों में अमेरिकी सेना के एक वेयरहाउस को नुकसान पहुंचने के संकेत सामने आए हैं। ईरान ने ने वीडियो जारी कर दावा किया कि यह नुकसान हालिया मिसाइल हमले के बाद हुआ है। अल-उदीद पश्चिम एशिया में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा माना जाता है। हालांकि, अमेरिका ने अब तक इन तस्वीरों या कथित नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। स्वतंत्र रूप से भी इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है।
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