हर बात पर ओवरथिंकिंग: ज्यादा सोचना बढ़ाएगा मेंटल स्ट्रेस, योग और ध्यान से पाएं मन की शांति

आधुनिक जीवनशैली की तेज रफ्तार, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंताओं ने लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है। आज बड़ी संख्या में लोग ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचने की समस्या से जूझ रहे हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी घटना, निर्णय या छोटी-छोटी बातों को बार-बार मन में दोहराना मानसिक तनाव, चिंता और अनिद्रा जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर व्यक्ति की कार्यक्षमता, आत्मविश्वास और भावनात्मक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है। ऐसे में योग और ध्यान को मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाने का एक प्रभावी और प्राकृतिक उपाय माना जाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि लगातार नकारात्मक विचारों में उलझे रहने से मस्तिष्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे तनाव हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है। जो एंग्जाइटी, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ावा देता है। कई लोगों को रात में नींद नहीं आती है। वे छोटी-छोटी बातों को लेकर घंटों सोचते रहते हैं। ऐसी स्थिति में दिमाग को शांत करने और विचारों को नियंत्रित करने के लिए योगासन और प्राणायाम बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं।
बालासन और शवासन से मिलेगी गहरी शांति
योग एक्सपर्ट्स के अनुसार, बालासन मानसिक तनाव कम करने वाले सबसे प्रभावी योगासनों में से एक है। यह आसन शरीर को आराम देने के साथ-साथ मस्तिष्क को भी शांति प्रदान करता है। नियमित रूप से कुछ मिनट तक बालासन करने से मानसिक थकान कम हो सकती है। मन अधिक स्थिर महसूस करता है। इसी प्रकार शवासन भी तनाव दूर करने के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इस आसन में शरीर पूरी तरह विश्राम की अवस्था में रहता है। जिससे मानसिक बेचैनी और तनाव धीरे-धीरे कम होने लगता है। योग सत्र के अंत में शवासन करने से दिमाग को गहरा आराम मिलता है। मानसिक संतुलन बेहतर होता है।
प्राणायाम और मेडिटेशन का विशेष महत्व
अनुलोम-विलोम प्राणायाम को मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे प्रभावी श्वास अभ्यासों में गिना जाता है। यह सांसों को नियंत्रित कर मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है। नियमित अभ्यास से तनाव, बेचैनी और अत्यधिक सोचने की आदत को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है। वहीं सुखासन में बैठकर ध्यान या मेडिटेशन करने से मन को स्थिरता मिलती है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रतिदिन 10 से 15 मिनट ध्यान करने से नकारात्मक विचारों की तीव्रता कम होती है। व्यक्ति वर्तमान क्षण पर अधिक केंद्रित रह पाता है।
विपरीत करनी आसन भी है लाभदायक
विपरीत करनी आसन को भी मानसिक और शारीरिक विश्राम के लिए प्रभावी माना जाता है। यह आसन रक्त संचार को बेहतर बनाता है। दिमाग को आराम पहुंचाने में मदद करता है। नींद की समस्या, तनाव और मानसिक थकान से जूझ रहे लोगों के लिए इसका नियमित अभ्यास लाभकारी हो सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है। यह मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती भी प्रदान करता है। नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान को दिनचर्या का हिस्सा बनाकर ओवरथिंकिंग की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। मानसिक शांति और सकारात्मकता हासिल की जा सकती है।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।









