बिहार में ‘चूहों ने खा लिए रिश्वत के पैसे’: सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, महिला अधिकारी को मिली जमानत

बिहार|25 अप्रैल 2026
सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, महिला अधिकारी को मिली जमानत

बिहार के एक भ्रष्टाचार मामले में ऐसा खुलासा हुआ है। जिसने पूरे न्याय तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सुनते हुए सुप्रीम कोर्ट भी हैरान रह गया। कोर्ट को बताया गया कि रिश्वत के रूप में जब्त किए गए नोट मालखाने में सुरक्षित नहीं रह सके। दावा किया गया कि चूहों ने उन नोटों को कुतरकर नष्ट कर दिया। यह सुनकर कोर्ट ने इस स्पष्टीकरण पर गंभीर आपत्ति जताई। साथ ही इसे बेहद चिंताजनक बताया।

यह मामला साल 2014 का है। उस समय एक महिला अधिकारी बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर तैनात थीं। उन पर 10 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा था। जांच के दौरान यह रकम जब्त कर ली गई थी। बाद में यह पैसा मालखाने में जमा कर दिया गया। लेकिन सुनवाई के दौरान सामने आया कि यह नकदी सुरक्षित नहीं रह पाई। मालखाने की खराब स्थिति के कारण नोट खराब हो गए। अधिकारियों ने दावा किया कि चूहों ने उन्हें कुतर दिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

इस मामले की सुनवाई जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ कर रही थी। कोर्ट ने इस दावे को आसानी से स्वीकार नहीं किया। उसने कहा कि चूहों द्वारा नोट नष्ट करने का यह स्पष्टीकरण भरोसेमंद नहीं लगता। कोर्ट ने इसे राज्य के लिए ‘राजस्व की भारी हानि’ बताया। साथ ही यह भी पूछा कि आखिर ऐसे कितने और मामले होंगे जहां जब्त की गई नकदी इसी तरह बर्बाद हो जाती है।

न्याय प्रणाली पर उठे सवाल

कोर्ट ने इस घटना को सिर्फ एक साधारण लापरवाही नहीं माना। उसने कहा कि यह न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। जब सबूत ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो न्याय कैसे होगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी को उजागर करती हैं। इससे जनता का भरोसा भी कमजोर होता है।

महिला अधिकारी को मिली राहत

इस मामले में एक अहम मोड़ भी आया। सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारी की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। उन्हें जमानत दे दी गई है। गौर करने वाली बात यह है कि ट्रायल कोर्ट ने पहले उन्हें बरी कर दिया था लेकिन बाद में हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी करार दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अंतरिम राहत दी है।

सरकारी तंत्र की बड़ी चूक

यह घटना सरकारी सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर करती है। मालखाने में रखे जाने वाले सबूतों की सुरक्षा बेहद जरूरी होती है। लेकिन यहां यह जिम्मेदारी ठीक से निभाई नहीं गई। अगर सबूत ही नष्ट हो जाएं तो केस कमजोर पड़ जाता है। इससे दोषियों को सजा दिलाना मुश्किल हो जाता है।

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