टेट्रा पैक और पाउच में शराब बिक्री पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस, युवाओं में भ्रम फैलाने का दावा

नई दिल्ली|6 घंटे पहले
केंद्र सरकार समेत कई पक्षों को नोटिस, युवाओं में भ्रम फैलाने का दावा

देश में शराब की बिक्री और उसकी पैकेजिंग को लेकर दायर एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार समेत कई संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में मांग की गई है कि टेट्रा पैक, सैशे और छोटे पाउच जैसी पैकेजिंग में शराब की बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए। अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है और इस पर विस्तृत सुनवाई के लिए सहमति भी दे दी है। इस मामले को लेकर देशभर में शराब की बिक्री के तौर-तरीकों और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने की। अदालत के समक्ष दायर याचिका संगठन कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि शराब की मौजूदा पैकेजिंग व्यवस्था न केवल उपभोक्ताओं में भ्रम पैदा कर रही है, बल्कि युवाओं और बच्चों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

जूस जैसी पैकेजिंग पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट विपिन नायर ने अदालत के सामने कई गंभीर तर्क रखे। उन्होंने कहा कि मौजूदा एक्साइज नियमों में ‘बोतल’ की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने के कारण शराब कंपनियां ऐसे पैकेजिंग डिजाइन का इस्तेमाल कर रही हैं, जो देखने में फलों के जूस या एनर्जी ड्रिंक जैसे लगते हैं। उन्होंने अदालत को बताया कि कई उत्पादों की पैकेजिंग पर सेब और अन्य फलों की तस्वीरें लगाई जाती हैं, जबकि अंदर वोदका या अन्य मादक पेय होते हैं। इससे आम उपभोक्ता, विशेषकर युवा वर्ग और बच्चे भ्रमित हो सकते हैं। याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह नागरिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा की रक्षा करे। ऐसे में शराब को आकर्षक और भ्रमित करने वाली पैकेजिंग में बेचने की अनुमति देना सार्वजनिक हित के खिलाफ है। अदालत में यह भी दलील दी गई कि छोटे पाउच और टेट्रा पैक में शराब की उपलब्धता से इसकी पहुंच आसान हो रही है, जिससे समाज पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

पूरे देश के लिए समान नीति की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से यह निर्देश जारी करने की मांग की गई है कि वह सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए शराब की पैकेजिंग और बिक्री को लेकर एक समान नीति तैयार करे। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टेट्रा पैक, सैशे और जूस जैसे दिखने वाले पैकेजिंग फॉर्मेट में शराब की बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए। साथ ही राज्यों के एक्साइज कानूनों और नियमों में संशोधन कर ‘बॉटलिंग’ की एक समान परिभाषा तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी अस्पष्टता न रहे।

कांच की बोतलों या कंटेनरों में बेची जाए शराब

याचिकाकर्ताओं का सुझाव है कि शराब केवल कांच की बोतलों या ऐसे कंटेनरों में ही बेची जाए। जिन्हें देखकर उपभोक्ता तुरंत पहचान सके कि यह मादक पेय है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से जवाब मांगा है। अब इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई पर सबकी निगाहें टिकी हैं, क्योंकि इसका असर देशभर में शराब की बिक्री और पैकेजिंग व्यवस्था पर पड़ सकता है।

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