बंगाल में 'परिवर्तन' का आगाज: मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य और CAA पर कड़ा रुख, नई सरकार के 12 बड़े फैसले

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तेज बदलाव देखने को मिल रहे हैं। सीएम शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में सरकार ने महज 12 दिनों के भीतर कई बड़े फैसले लेकर राज्य की नीतियों में व्यापक बदलाव के संकेत दिए हैं। इन फैसलों में सबसे ज्यादा चर्चा मदरसों में ‘वंदे मातरम’ को अनिवार्य किए जाने, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू करने और भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के लिए BSF को जमीन देने के निर्णय की हो रही है। राज्य सरकार ने 19 मई को आदेश जारी करते हुए कहा कि अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत संचालित सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त मदरसों में अब सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य होगा।
सरकार के इस आदेश के बाद राज्य के सभी मदरसों को नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू करने और उसकी रिपोर्ट विभाग को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इससे पहले मदरसों में राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ बंगाली कवि गुलाम मुस्तफा की रचना ‘अनंत असीम प्रेममय तुमी’ गाई जाती थी। सरकार का कहना है कि यह फैसला विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को लेकर बहस भी तेज हो गई है।
CAA लागू, BSF को जमीन और केंद्रीय योजनाओं को मंजूरी
नई सरकार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को भी राज्य में लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सरकार के मुताबिक, 31 दिसंबर 2024 तक भारत आए सात समुदायों के लोगों को इस कानून का लाभ मिलेगा और उन्हें किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई या हिरासत का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके साथ ही भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए BSF को 600 एकड़ जमीन 45 दिनों के भीतर सौंपने का फैसला लिया गया है, ताकि सीमा फेंसिंग से जुड़ी वर्षों पुरानी समस्या खत्म हो सके।
‘आयुष्मान भारत’ योजना को भी मंजूरी
सरकार ने केंद्र की महत्वाकांक्षी ‘आयुष्मान भारत’ योजना को भी लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत राज्य के गरीब परिवारों को पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। लंबे समय से लंबित जनगणना प्रक्रिया को शुरू करने का आदेश भी जारी कर दिया गया है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों और शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को अधिकतम आयु सीमा में पांच साल की छूट देने का फैसला लिया गया है, जिसे युवाओं के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव
नई सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर भी कई बड़े फैसले लिए हैं। आईएएस, आईपीएस, डब्ल्यूबीपीएस अधिकारियों को अब केंद्र सरकार के ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने की अनुमति दी गई है। वहीं राज्य में भारतीय न्याय संहिता समेत नए केंद्रीय आपराधिक कानूनों को लागू करने का निर्णय भी लिया गया है। इसके साथ ही 2021 की चुनावी हिंसा में मारे गए बीजेपी कार्यकर्ताओं के परिवारों को आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की गई है। सरकार ने धर्म आधारित वित्तीय सहायता वाली कई योजनाओं को बंद करने का फैसला भी किया है। अधिकारियों का कहना है कि अब राज्य में बिना किसी धार्मिक भेदभाव के समान कल्याणकारी योजनाएं लागू की जाएंगी। महिलाओं के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ शुरू करने की घोषणा भी की गई है, जिसके तहत हर महीने तीन हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा भी लागू होगी।
गोहत्या कानून और नियुक्तियों पर भी कार्रवाई
सरकार ने प्रशासनिक सुधार के तहत विभिन्न बोर्डों, निगमों और आयोगों में मनोनीत अध्यक्षों व निदेशकों की नियुक्तियां रद्द कर दी हैं। रिटायरमेंट के बाद दोबारा नियुक्त किए गए अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा गोहत्या रोकने के लिए नया नोटिस जारी कर स्पष्ट किया गया है कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट किसी भी मवेशी या भैंस की हत्या पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। नई सरकार के इन फैसलों को राज्य की राजनीतिक दिशा में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इन निर्णयों का असर बंगाल की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।
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