बंगाल विधानसभा की नई तस्वीर: 65% विधायकों पर केस, महिलाएं सिर्फ 13%; ADR रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

दिल्ली|07 मई 2026
65% विधायकों पर केस, महिलाएं सिर्फ 13%; ADR रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी ADR और पश्चिम बंगाल इलेक्शन वॉच की ताजा रिपोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद नई विधानसभा की एक अलग ही तस्वीर सामने रख दी है। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे कई विधायक कम पढ़े-लिखे हैं। बड़ी संख्या में विधायकों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। महिला प्रतिनिधित्व भी घटा है। वहीं करोड़पति नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।

ADR ने 292 विजेता विधायकों के चुनावी एफिडेविट का विश्लेषण किया। इसमें शिक्षा, संपत्ति, आपराधिक रिकॉर्ड और उम्र से जुड़े आंकड़ों ने राजनीतिक व्यवस्था को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल विधानसभा के कुल 292 विजेता विधायकों में से 92 विधायक ऐसे हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई 5वीं से 12वीं के बीच बताई है। यानी करीब 32 प्रतिशत विधायक स्कूल स्तर तक ही पढ़े हैं। हालांकि 185 विधायक यानी 63 प्रतिशत ने खुद को ग्रेजुएट या उससे अधिक शिक्षित बताया है। इसके अलावा 9 विधायक डिप्लोमा धारक हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 5 विधायक सिर्फ साक्षर हैं, जबकि 1 विधायक ने खुद को निरक्षर घोषित किया है। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि राज्य की राजनीति में शिक्षा अभी भी निर्णायक फैक्टर नहीं बन पाई है। बड़ी संख्या में कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में सफल रहे।

महिलाओं की भागीदारी में आई गिरावट

रिपोर्ट में सबसे बड़ा झटका महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सामने आया। 2026 विधानसभा चुनाव में कुल 292 विजेता विधायकों में सिर्फ 37 महिलाएं हैं। यानी विधानसभा में महिला प्रतिनिधित्व महज 13 प्रतिशत रह गया है। पिछले चुनाव यानी 2021 में 40 महिला विधायक जीतकर पहुंची थीं, जो कुल संख्या का 14 प्रतिशत थीं। इस बार यह संख्या और घट गई। चुनाव में कुल 385 महिला उम्मीदवार मैदान में उतरी थीं। लेकिन जीत हासिल करने वालों की संख्या बेहद कम रही। राजनीतिक एक्सपर्टस का मानना है कि लगातार महिला सशक्तिकरण की बात होने के बावजूद राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब भी सीमित बनी हुई है।

65 प्रतिशत विधायकों पर आपराधिक मामले

ADR की रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक हिस्सा आपराधिक मामलों से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 292 विजेता विधायकों में से 190 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। यानी कुल 65 प्रतिशत विधायक किसी न किसी केस का सामना कर रहे हैं। 2021 में यह आंकड़ा 49 प्रतिशत था। उस समय 142 विधायकों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी। इस बार ऐसे विधायकों की संख्या में 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 294 विधानसभा क्षेत्रों में से 129 सीटें “रेड अलर्ट” श्रेणी में रहीं। इसका मतलब उन सीटों पर चुनाव लड़ने वाले तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज थे। इन आंकड़ों ने एक बार फिर राजनीति के अपराधीकरण को लेकर बहस तेज कर दी है।

विधायकों की संपत्ति में जबरदस्त उछाल

रिपोर्ट में विधायकों की संपत्ति को लेकर भी बड़े खुलासे हुए हैं। 2026 में दोबारा चुने गए 102 विधायकों की औसत संपत्ति पिछले पांच वर्षों में 1.43 करोड़ रुपये बढ़ी है। यानी उनकी संपत्ति में करीब 60 प्रतिशत का इजाफा हुआ। कुल 292 विजेता विधायकों की संयुक्त संपत्ति 1,091 करोड़ रुपये बताई गई है। अगर औसत निकाला जाए तो हर विधायक की संपत्ति लगभग 3.73 करोड़ रुपये है। 2021 में प्रति विधायक औसत संपत्ति 2.53 करोड़ रुपये थी। यानी पांच साल में विधायकों की संपत्ति में बड़ा उछाल देखने को मिला है।

युवा कम, मध्यम आयु वर्ग का दबदबा

उम्र के आंकड़े भी काफी दिलचस्प रहे। रिपोर्ट के मुताबिक 46 विधायक यानी 16 प्रतिशत की उम्र 25 से 40 साल के बीच है। सबसे ज्यादा 184 विधायक 41 से 60 वर्ष आयु वर्ग के हैं। यह कुल संख्या का 63 प्रतिशत है। वहीं 59 विधायक ऐसे हैं जिनकी उम्र 61 से 80 वर्ष के बीच है। इसके अलावा 3 विधायक 80 वर्ष से अधिक उम्र के भी हैं। इससे साफ है कि बंगाल की राजनीति में अब भी मध्यम और वरिष्ठ आयु वर्ग का दबदबा कायम है।

बंगाल की नई विधानसभा पर उठ रहे बड़े सवाल

ADR की यह रिपोर्ट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति की जमीनी सच्चाई भी दिखाती है। एक तरफ करोड़पति और आपराधिक मामलों वाले नेताओं की संख्या बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ महिलाओं की भागीदारी घटती दिखाई दे रही है। शिक्षा का स्तर भी पूरी तरह संतोषजनक नहीं माना जा सकता।

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