भारत-वियतनाम की चीन को दो टूक: रिश्तों को मिला ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा, ब्रह्मोस मिसाइल डील पर बढ़ी बातचीत

दिल्ली|07 मई 2026
रिश्तों को मिला ‘समग्र रणनीतिक साझेदारी’ का दर्जा, ब्रह्मोस मिसाइल डील पर बढ़ी बातचीत

भारत और वियतनाम ने बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच अपने रिश्तों को नई ऊंचाई देने का बड़ा फैसला लिया है। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम के बीच हुई शिखर वार्ता में दोनों देशों ने संबंधों को “समग्र रणनीतिक साझेदारी” का दर्जा देने पर सहमति जताई।

यह फैसला ऐसे समय में हुआ है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और समुद्री दावों को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों ने साफ संकेत दिया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित व्यवस्था और समुद्री सुरक्षा को कमजोर करने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दक्षिण चीन सागर पर चीन को सख्त संदेश

भारत और वियतनाम ने संयुक्त बयान में साफ कहा कि दक्षिण चीन सागर में अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन जरूरी है। किसी भी देश को ताकत दिखाकर डर का माहौल बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दोनों देशों ने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए। इसके लिए 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन यानी UNCLOS का पालन जरूरी है। संयुक्त बयान में समुद्री शांति, स्थिरता, सुरक्षा और फ्री नेविगेशन पर जोर दिया गया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन लगातार दक्षिण चीन सागर में सैन्य उपस्थिति बढ़ा रहा है और कई देशों के साथ उसका सीमा विवाद चल रहा है।

ब्राह्मोस मिसाइल डील पर बढ़ी चर्चा

बैठक में सबसे अहम चर्चा रक्षा और सुरक्षा सहयोग को लेकर हुई। दोनों नेताओं के बीच भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की संभावित बिक्री पर भी बातचीत हुई। यह मिसाइल भारत और रूस की संयुक्त तकनीक से विकसित की गई है। दक्षिण-पूर्व एशिया में फिलीपींस पहले ही इस मिसाइल सिस्टम को खरीद चुका है। अब वियतनाम के साथ भी इस दिशा में बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है। विदेश मंत्रालय के सचिव पी कुमारन ने बताया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को लेकर लगातार प्रगति हो रही है। भारत ने वियतनाम को सुखोई लड़ाकू विमानों के रखरखाव और तकनीकी सहायता की पेशकश भी की है।

रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाने की तैयारी

भारत और वियतनाम पहले ही 2030 तक रक्षा संबंध मजबूत करने के लिए साझा विजन डॉक्यूमेंट जारी कर चुके हैं। बुधवार की बैठक में इसकी समीक्षा भी की गई। दोनों देशों ने रक्षा नीति संवाद, संयुक्त सैन्य अभ्यास, नई रक्षा तकनीक, रिसर्च और को-प्रोडक्शन को बढ़ावा देने पर सहमति जताई। इसके अलावा नौसेना पोतों की विजिट, एयरफोर्स सहयोग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और शांति स्थापना मिशनों में साझेदारी बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की आक्रामक रणनीति के बीच भारत और वियतनाम का यह रक्षा सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बड़ा सामरिक संतुलन बना सकता है।

2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

दोनों देशों ने आर्थिक रिश्तों को भी नई गति देने का फैसला लिया। भारत और वियतनाम ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। बैठक के बाद दोनों देशों के बीच कुल 13 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें डिजिटल पेमेंट, दुर्लभ खनिज, फार्मास्यूटिकल्स, शिक्षा और टेक्नोलॉजी जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी।

UPI और वियतनाम के पेमेंट सिस्टम को जोड़ने की तैयारी

पीएम मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत का UPI और वियतनाम का फास्ट पेमेंट सिस्टम जल्द एक-दूसरे से लिंक किया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच फाइनेंशियल कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि संस्कृति, कनेक्टिविटी, क्षमता विस्तार, सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को नए स्तर तक ले जाया जाएगा। मोदी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति बनने के सिर्फ एक महीने बाद तो लाम का भारत दौरा इस बात का संकेत है कि वियतनाम भारत के साथ संबंधों को कितनी प्राथमिकता देता है।

चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच बढ़ी नजदीकियां

एक्सपर्टस का मानना है कि भारत और वियतनाम की बढ़ती नजदीकियों के पीछे सबसे बड़ा कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलता भू-राजनीतिक माहौल है। दोनों देश चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों, सप्लाई चेन जोखिम और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। यही वजह है कि अब रक्षा, ऊर्जा, दुर्लभ खनिज और टेक्नोलॉजी सेक्टर में दोनों देशों की साझेदारी तेजी से मजबूत हो रही है। नई दिल्ली में हुई यह शिखर वार्ता साफ संकेत देती है कि आने वाले समय में भारत और वियतनाम एशिया की रणनीतिक राजनीति में एक मजबूत साझेदार के रूप में उभर सकते हैं।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करेंGET IT ON Google Play

अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।