भदोही फिर बना संत रविदास नगर: पांचवीं बार बदला जिले का नाम, नाम परिवर्तन पर राजनीतिक बहस तेज

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले के नाम से 'भदोही' शब्द हटाकर उसे फिर से संत रविदास नगर घोषित कर दिया। इसके साथ ही जिले का नाम पांचवीं बार बदला गया है। इस निर्णय के बाद राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। जिले के नाम को लेकर पहले भी कई बार बदलाव और आंदोलन हो चुके हैं।
30 जून 1994 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने काशी नरेश विभूति नारायण की मौजूदगी में जीआईसी मैदान में भदोही को प्रदेश का 65वां जिला घोषित किया था। लंबे समय से अलग जिला बनाए जाने की मांग चल रही थी, जिसके पूरा होने पर क्षेत्र के लोगों में खुशी थी। बाद में चार दिसंबर 1997 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने जौनपुर जिले से भदोही में शामिल बरसठी तहसील को वापस जौनपुर में जोड़ते हुए जिले का नाम संत रविदास नगर कर दिया। इसके बाद भदोही नाम हटाए जाने के विरोध में लंबा आंदोलन चला।
नाम को लेकर कई बार हुए आंदोलन
वर्ष 1999 में भाजपा सरकार बनने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता ने 12 नवंबर 1999 को जिले के नाम में फिर भदोही जोड़ दिया। इसके बाद आंदोलन शांत हुआ। हालांकि बाद में अखिलेश यादव सरकार ने छह दिसंबर 2014 को जिले का नाम फिर भदोही कर दिया। वहीं, सरकारी अभिलेखों में संत रविदास नगर भदोही नाम का भी इस्तेमाल होता रहा। 29 जुलाई 2026 को जिले का नाम फिर संत रविदास नगर किए जाने से राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। सत्ता पक्ष इस फैसले को उचित ठहरा रहा है। वहीं, विपक्ष इसे राजनीतिक उद्देश्य से लिया गया निर्णय बता रहा है। जिले के गठन और नाम को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पं. श्यामधर मिश्र और जनसंघ नेता मुरलीधर पांडेय के नेतृत्व में लंबे समय तक आंदोलन हुए थे। नाम परिवर्तन के विरोध में विभिन्न चरणों में प्रदर्शन, तोड़फोड़ और कई नेताओं और छात्र नेताओं की गिरफ्तारी भी हुई थी। अब एक बार फिर नाम परिवर्तन के फैसले ने जिले में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।
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