छात्रनेताओं के विरोध के बाद झुका यूनिवर्सिटी प्रशासन: वन विभाग ने पेड़ की कटान को रोका, कुलपति ने कहा- मामले की होगी जांच

गोरखपुर|16 मई 2026
वन विभाग ने पेड़ की कटान को रोका, कुलपति ने कहा- मामले की होगी जांच

डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी में पिछले कई महीनों से पेड़ों की लगातार कटाई हो रही है। इसे लेकर छात्रों और छात्र संगठनों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे पर छात्र और छात्र संगठन के कार्यकर्ता यूनिवर्सिटी के मेन गेट पर पहुंच गए। इसके बाद सभी छात्र प्रशासनिक भवन के नीचे धरने पर बैठ गए।

धरने की जानकारी मिलने पर यूनिवर्सिटी की कुलपति प्रो. पूनम टंडन छात्रों और छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचीं। करीब दो घंटे चले प्रदर्शन के बाद छात्रों की कुछ मांगों पर मौखिक सहमति बनी। हालांकि छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन और वन विभाग को सभी सहमतियां लिखित रूप में देनी होंगी।

छात्रों की प्रमुख मांगें

  1. तत्काल पेड़ों की कटाई रोकी जाए।
  2. कटे हुए पेड़ों की सही संख्या सार्वजनिक की जाए।
  3. तय संख्या से अधिक पेड़ कटे होने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।
  4. छात्रों को छात्रावास खाली करने के आदेश वापस लिए जाएं।
  5. बिना अनुमति छात्रों के कमरों में वार्डन की एंट्री रोकी जाए।

वन विभाग ने 1192 पेड़ों की कटान पर लगाई गई रोक

छात्र और छात्र संगठनों के विरोध के बाद वन विभाग ने कटान पर रोक लगा दी है। इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिया गया है। आदेश में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक यूनिवर्सिटी परिसर में किसी भी पेड़ की कटान नहीं होगी। गोरखपुर उप वन प्रभाग द्वारा विभिन्न प्रजातियों के 1192 पेड़ों की कटान की अनुमति दी गई थी। हालांकि, छात्र आंदोलन और जांच की मांग को देखते हुए इस अनुमति पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 22 अप्रैल 2026 को जारी कटान अनुमति आदेश को अगले निर्देश तक स्थगित किया जाता है। जांच प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी प्रकार की कटान नहीं होगी। प्रभागीय वनाधिकारी की ओर से जारी लेटर यूनिवर्सिटी प्रशासन, उप प्रभागीय वनाधिकारी और कैंट थाने को भी भेजा गया है। लेटर में कहा गया है कि जांच पूरी होने तक कटान की प्रक्रिया बंद रहेगी। साथ ही पूरे मामले की रिपोर्ट तैयार की जाएगी।

छात्रों ने कुलपति के खिलाफ लगाए नारे

धरने के दौरान छात्रों और छात्र संगठनों ने कुलपति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र और विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ता मौजूद रहे। स्थिति को देखते हुए यूनिवर्सिटी प्रशासन और पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा। छात्रों का दावा है कि पिछले आठ महीनों में दो हजार से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। छात्रों ने आरोप लगाया कि पेड़ों की कटाई में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है। उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए हैं। छात्र संगठन लगातार पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि यूनिवर्सिटी परिसर की हरियाली लगातार खत्म की जा रही है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। छात्रों ने मांग की है कि पेड़ों की कटाई से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक यूनिवर्सिटी प्रशासन पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसके बाद कुलपति ने मामले की जांच कराने की बात कही। साथ ही वन विभाग से मौखिक रूप से कटान रोकने का अनुरोध किया गया।

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