तिहरे हत्याकांड के दोषी पति को फांसी: तीन लाख रुपये का फाइन, कोर्ट ने कहा- ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामला

जिले में पत्नी और दो मासूम बेटों की हत्या के चार वर्ष पुराने चर्चित तिहरे हत्याकांड में कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। दोषी पति राजेश गुप्ता को फांसी की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव कुमार त्यागी ने मामले को “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” की श्रेणी में मानते हुए मृत्युदंड के साथ तीन लाख रुपये का फाइन भी लगाया है। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि दोषी को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। हालांकि यह सजा उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही प्रभावी होगी।
कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि आरोपी ने अपनी पत्नी और दो नाबालिग बच्चों की हत्या अत्यंत निर्मम और अमानवीय तरीके से की थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी ने चाकू, हंसुआ और पहसुल जैसे धारदार हथियारों से तीनों का गला रेतकर उनकी हत्या की थी। अदालत ने टिप्पणी की कि यह कृत्य समाज की नैतिकता और मानवीय मूल्यों को झकझोर देने वाला है। जिससे यह मामला दुर्लभतम अपराधों की श्रेणी में आता है।
घटना के बाद खुद थाने पहुंचा था आरोपी
यह दर्दनाक घटना छह सितंबर 2021 की रात तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के किशुनदासपट्टी गांव में हुई थी। आरोपी राजेश गुप्ता ने कथित रूप से अवैध संबंधों के शक में अपनी पत्नी निक्की गुप्ता और दो बेटों शिवम (सात) और आयुष (तीन) की गला रेतकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपी स्वयं थाने पहुंचा और पुलिस के समक्ष अपना अपराध स्वीकार करते हुए कहा था कि “मैंने सबको मार डाला है।”
जांच में सामने आए अहम साक्ष्य
सूचना पर पहुंची पुलिस ने घर से तीनों बॉडी बरामद की थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर गहरे घावों की पुष्टि हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से चाकू, हंसिया और पहसुल बरामद किए थे। जो अभियोजन पक्ष के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हुए। मृतका के भाई अमर गुप्ता की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था। सुनवाई के दौरान 11 गवाहों की गवाही दर्ज की गई।
अदालत ने सुनाया कड़ा संदेश
शासकीय अधिवक्ता जेपी यादव ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आरोपी के स्वीकारोक्ति बयान को आधार बनाकर मजबूत पैरवी की। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई। इस फैसले को न्याय व्यवस्था में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। जो ऐसे जघन्य अपराधों के खिलाफ कठोर रुख को दर्शाता है।
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