प्रेमानंद महाराज की भावुक अपील: बोले- “मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा”, भक्तों से कहा- मेरी चिंता छोड़कर श्रीजी का लगाइए ध्यान

मथुरा|55 मिनट पहले
बोले- “मैं रहूं न रहूं, हमेशा साथ रहूंगा”, भक्तों से कहा- मेरी चिंता छोड़कर श्रीजी का लगाइए ध्यान

वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज ने अपनी खराब सेहत के बीच भक्तों और शिष्यों के नाम एक भावुक संदेश जारी किया है। रविवार को केली कुंज आश्रम ट्रस्ट के यूट्यूब चैनल पर जारी 1 मिनट 19 सेकेंड के वीडियो में प्रेमानंद महाराज ने अपने अनुयायियों से चिंता न करने और भजन-नाम जप में मन लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि चाहे वह सामने रहें या न रहें, लेकिन अपने भक्तों के साथ हमेशा जुड़े रहेंगे। उनका यह संदेश सामने आने के बाद देशभर के श्रद्धालुओं में भावुकता का माहौल देखा जा रहा है।

वीडियो संदेश में प्रेमानंद महाराज ने कहा, “बिल्कुल चिंता मत करो। हम मिलें न मिलें, बोलें न बोलें, हम आप सबको बहुत प्यार करते हैं। चिंता नहीं करनी है। बिना बोले भी तुम्हारे दिमाग में हम रहेंगे।” उन्होंने भक्तों से कहा कि वे गुरुदेव के बताए मार्ग पर चलते रहें और अपनी सेवा तथा भजन में मन लगाएं। महाराज ने कहा कि उनका मौन और एकांतवास स्वयं के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के कल्याण के लिए है। उन्होंने कहा कि जो कुछ होना था, वह उनके जीवन में हो चुका है और अब जो कुछ भी हो रहा है, वह केवल भक्तों की आध्यात्मिक उन्नति के लिए हो रहा है।

स्वास्थ्य कारणों से रुकी पदयात्रा

प्रेमानंद महाराज पिछले 17 मई से अपनी प्रसिद्ध रात्रि पदयात्रा पर नहीं निकल रहे हैं। उनकी तबीयत खराब होने के कारण एकांतिक दर्शन और भक्तों से व्यक्तिगत मुलाकात भी फिलहाल बंद कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक उनकी दोनों किडनियां प्रभावित हैं और उन्हें सप्ताह में दो से तीन बार डायलिसिस करानी पड़ती है। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी है। 17 मई की रात हजारों श्रद्धालु रोज की तरह उनके दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन महाराज पदयात्रा पर नहीं निकले। इसके बजाय उनके शिष्यों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं को जानकारी दी कि स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण पदयात्रा स्थगित की जा रही है। यह सूचना सुनते ही वहां मौजूद भक्त भावुक हो उठे और बिना दर्शन किए वापस लौटना पड़ा। हालांकि कुछ दिन पहले प्रेमानंद महाराज अपने केली कुंज आश्रम से निकलकर वराह घाट स्थित अपने गुरु संत गोविंद शरण महाराज के आश्रम पहुंचे थे, जहां उन्होंने दर्शन किए।

लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

तबीयत खराब होने से पहले प्रेमानंद महाराज प्रतिदिन तड़के करीब 3 बजे केली कुंज आश्रम से सौभरी वन के लिए पदयात्रा पर निकलते थे। वह लगभग डेढ़ किलोमीटर पैदल चलकर जाते थे और इस दौरान रास्ते में हजारों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए खड़े रहते थे। सामान्य दिनों में करीब 20 हजार लोग पदयात्रा के दौरान उनके दर्शन करने पहुंचते थे, जबकि सप्ताहांत और विशेष पर्वों पर यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती थी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी करोड़ों लोग सुनते हैं प्रवचन

वृंदावन में प्रेमानंद महाराज को बड़ी संख्या में लोग आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में मानते हैं। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उनके प्रवचन और संदेशों को करोड़ों लोग सुनते हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर भक्तों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है। हालांकि महाराज ने अपने संदेश में भक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि वे निर्भय और निश्चिंत होकर भजन करते रहें, क्योंकि उनका आशीर्वाद हमेशा उनके साथ रहेगा।

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