बलिया में दो किमी में एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म: इलाज से पहले ही मरीज की मौत, बाइकों से पेट्रोल निकालकर डाला

बलिया से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां सिस्टम की लापरवाही ने एक व्यक्ति की जान ले ली। बैरिया क्षेत्र के पांडेपुर निवासी 50 वर्षीय छट्ठू शर्मा की समय पर इलाज न मिलने से मौत हो गई। आरोप है कि एंबुलेंस में पेट्रोल खत्म हो गया और समय पर ईंधन नहीं मिलने के कारण मरीज अस्पताल नहीं पहुंच सका। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक बुधवार रात करीब 10 बजे छट्ठू शर्मा को अचानक सीने में तेज दर्द उठा। परिजन घबरा गए। तुरंत गांव के प्रधान सत्येंद्र यादव उर्फ सतन यादव को सूचना दी गई। प्रधान अपनी निजी एंबुलेंस लेकर मौके पर पहुंचे। जल्दबाजी में मरीज को एंबुलेंस में बैठाकर अस्पताल के लिए रवाना हो गए।
दो किलोमीटर बाद ही एंबुलेंस बंद
एंबुलेंस अभी करीब दो किलोमीटर ही चली थी कि अचानक रास्ते में रुक गई। जांच करने पर पता चला कि एंबुलेंस का पेट्रोल खत्म हो गया है। इस स्थिति ने सभी को परेशान कर दिया। मरीज की हालत लगातार बिगड़ रही थी। समय के खिलाफ दौड़ चल रही थी लेकिन सिस्टम ने साथ नहीं दिया।
पेट्रोल पंप पर नहीं मिला ईंधन
एंबुलेंस को पास के टेंगरही गांव स्थित पेट्रोल पंप तक ले जाया गया। यहां मौजूद लोगों ने पंप कर्मी से पांच लीटर पेट्रोल देने की मांग की लेकिन सेल्समैन ने पेट्रोल खत्म होने की बात कहकर मना कर दिया। परिजनों और प्रधान ने काफी अनुरोध किया। लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
एसडीएम से नहीं मिला सहयोग
स्थिति गंभीर होती देख ग्राम प्रधान ने बैरिया एसडीएम संजय कुशवाहा को फोन किया। आरोप है कि एसडीएम ने निजी एंबुलेंस का मामला बताकर मदद करने से इनकार कर दिया। इससे लोगों में और नाराजगी बढ़ गई। स्थानीय लोग सिस्टम की इस बेरुखी से हैरान रह गए।
मोटरसाइकिल से पेट्रोल निकालकर किया इंतजाम
आखिरकार गांव वालों ने खुद ही समाधान निकाला। तीन-चार मोटरसाइकिल मंगाई गईं। उनसे पेट्रोल निकालकर एंबुलेंस में डाला गया। इसके बाद एंबुलेंस दोबारा अस्पताल के लिए रवाना हुई लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। जब एंबुलेंस मरीज को लेकर अस्पताल जा रही थी तभी रास्ते में छट्ठू शर्मा ने दम तोड़ दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। यह घटना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई है।
जांच के आदेश
डीएसओ देवमणि मिश्र ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि यदि पेट्रोल स्टॉक में था तो देने से मना नहीं किया जा सकता। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत यह नियम लागू होता है। अब यह जांच होगी कि उस समय पंप पर पेट्रोल उपलब्ध था या नहीं।
अधूरा नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर
ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।










