“पद के बदले हमबिस्तर होने का दबाव”: महोबा बीजेपी जिलाध्यक्ष पर पूर्व महिला नेता के सनसनीखेज आरोप, धमकी और साजिश का भी दावा

महोबा में भारतीय राजनीति को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी की पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी ने पार्टी के जिलाध्यक्ष मोहन लाल कुशवाहा पर बेहद गंभीर और आपत्तिजनक आरोप लगाए हैं। दीपाली का कहना है कि उन्हें संगठन में बड़ा पद देने के बदले अनैतिक संबंध बनाने का दबाव डाला गया। इतना ही नहीं उनके अनुसार पार्टी के कुछ अन्य पदाधिकारियों ने भी इस “डील” को मानने के लिए दबाव बनाया। मामला अब पुलिस तक पहुंच चुका है और जांच शुरू हो गई है।
सोमवार दोपहर दीपाली तिवारी अपने पति के साथ एसपी कार्यालय पहुंचीं। उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शशांक सिंह ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है। जांच कराई जा रही है। दीपाली ने मांग की है कि निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने मोहनलाल कुशवाहा को जिलाध्यक्ष पद से हटाने की भी मांग रखी है।
“पद के बदले समझौते” का आरोप
दीपाली का आरोप है कि जब उन्होंने संगठन में बेहतर पद की मांग की तो उन्हें बुलाकर बेहद आपत्तिजनक प्रस्ताव दिया गया। उनके मुताबिक, उनसे कहा गया कि अगर वे “सहयोग” करेंगी तो उन्हें जिला उपाध्यक्ष बनाया जा सकता है। साथ ही लखनऊ और दिल्ली तक साथ आने की बात कही गई। दीपाली का दावा है कि उन्हें इशारों में नहीं, बल्कि सीधे तौर पर “हमबिस्तर होने” की बात कही गई। यह सुनकर वह स्तब्ध रह गईं और तुरंत वहां से चली गईं।
टिकट और पद का लालच
दीपाली ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें जिला पंचायत चुनाव का टिकट दिलाने का लालच दिया गया। कहा गया कि “एक बार समझौता कर लीजिए, आगे सब आसान हो जाएगा।” उन्होंने साफ इनकार किया। इसके बाद कथित तौर पर दबाव का दौर शुरू हुआ। उनके अनुसार, एक करीबी पदाधिकारी पंकज तिवारी के जरिए भी उन पर दबाव बनाया गया कि वे जिलाध्यक्ष की बात मान लें।
परिवार को निशाना बनाने की बात
मामला यहीं नहीं रुका। दीपाली ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी गई कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके पति को झूठे दुष्कर्म केस में फंसा दिया जाएगा। यह धमकी उनके लिए सबसे बड़ा झटका थी। उन्होंने यह बात अपने पति को बताई। पति के कहने पर ही उन्होंने सामने आने का फैसला लिया। दीपाली का कहना है कि वह डरने वाली नहीं हैं और सच के लिए लड़ाई जारी रखेंगी।
34 दिन पहले दिया था इस्तीफा
दीपाली ने बताया कि उन्होंने करीब 34 दिन पहले जिला मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना है कि संगठन में उन्हें उचित सम्मान और पद नहीं मिला। हालांकि जिलाध्यक्ष ने उनके इस्तीफे को मंजूर बताते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। जबकि शीर्ष नेतृत्व ने इसे आधिकारिक रूप से मंजूर नहीं किया। इस विरोधाभास ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है।
10 साल का राजनीतिक सफर, अब खुलकर विरोध
दीपाली तिवारी पिछले 10 वर्षों से भाजपा में सक्रिय रही हैं। वह “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान की जिला संयोजिका भी रह चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इतने वर्षों में कभी ऐसा अनुभव नहीं हुआ। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि वह अपने चरित्र के साथ समझौता नहीं करेंगी, चाहे इसके लिए उन्हें कितना भी संघर्ष करना पड़े।
जिलाध्यक्ष ने आरोपों को बताया साजिश
दूसरी ओर, मोहन लाल कुशवाहा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह झूठे और मनगढ़ंत आरोप हैं। उनका कहना है कि यह उनकी छवि खराब करने की साजिश है। उन्होंने दावा किया कि आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
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