भीषण गर्मी के बीच मौसम ने ली करवट: ललितपुर से बिहार-राजस्थान तक बारिश, मई में अल नीनो की आहट

उत्तरप्रदेश|
ललितपुर से बिहार-राजस्थान तक बारिश, मई में अल नीनो की आहट

रविवार को ललितपुर में मौसम ने ऐसा यू-टर्न लिया, जिसने लोगों को चौंका भी दिया और राहत भी दी। सुबह से ही तेज धूप और उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान कर रखा था। दोपहर तक तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। सड़कों पर सन्नाटा था। लोग घरों में कैद थे। लेकिन ठीक दोपहर 2:40 बजे मौसम ने अचानक करवट ली। तेज हवाएं चलने लगीं। आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद झमाझम बारिश शुरू हो गई। कुछ ही मिनटों में गर्मी का असर कम होने लगा। लोगों ने राहत की सांस ली। बच्चे और युवा घरों से बाहर निकल आए। गर्मी से जूझ रहे लोगों के लिए यह मौसम किसी राहत भरे तोहफे से कम नहीं था।

इसी तरह बिहार में भी मौसम का मूड अचानक बदल गया। रविवार को सुपौल, रक्सौल, मधुबनी समेत करीब 10 जिलों में तेज बारिश हुई। दरभंगा में दिन के समय ही अंधेरा छा गया। काले बादलों ने पूरे शहर को ढक लिया। वहीं किशनगंज में तेज आंधी के साथ बारिश हुई। कई जगह पेड़ उखड़ गए। बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। हालांकि, बारिश ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत जरूर दी। तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लोगों ने मौसम के इस बदलाव का स्वागत किया।

राजस्थान में भी बारिश और ओले

राजस्थान में भी मौसम ने चौंकाया। जहां एक तरफ तेज गर्मी लोगों को झुलसा रही थी वहीं अचानक बारिश ने माहौल ठंडा कर दिया। बीकानेर, सीकर, सवाई माधोपुर और बाड़मेर में बारिश दर्ज की गई। राजसमंद जिले में तो ओले भी गिरे। गर्म हवाओं के बीच आई इस बारिश ने तापमान को कुछ हद तक कम किया। किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई। हालांकि, कुछ इलाकों में आंधी के कारण नुकसान की खबरें भी सामने आईं।

मई में अल नीनो की दस्तक

इसी बीच मौसम को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वर्ल्ड वेदर ऑर्गनाइजेशन ने अपने नए अनुमान में बदलाव किया है। संगठन के अनुसार, इस साल मई से ही अल नीनो कंडीशन विकसित होने की संभावना है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु स्थिति होती है जिसका असर पूरे विश्व के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका सीधा असर मानसून पर देखने को मिलता है।

मानसून पर पड़ सकता है असर

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अल नीनो जल्दी सक्रिय होता है, तो मानसून कमजोर पड़ सकता है। इससे बारिश सामान्य से कम हो सकती है। इससे पहले आईएमडी ने भी संकेत दिए थे कि इस साल बारिश औसत से कम रह सकती है। इसका असर खेती, जल संकट और तापमान पर पड़ सकता है। यानी अभी मिली राहत अस्थायी हो सकती है।

नव्य जागरण

पूरी खबर पढ़ें ऐप पर

ऐप डाउनलोड करने के लिए QR कोड
ऐप डाउनलोड करने के लिए QR स्कैन करें

अधूरी नहीं! पूरी खबर पढ़ें नव्य जागरण ऐप पर

ताजा खबरें, लोकल अपडेट और ब्रेकिंग अलर्ट सीधे अपने मोबाइल पर पाएं।