पीलीभीत में पांच करोड़ का घोटाला: चपरासी ने फर्जी आईडी से उड़ाए करोड़ों, दो पत्नियों के खातों में भेजी सबसे ज्यादा रकम

पीलीभीत के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालय में सामने आए करोड़ों के घोटाले ने प्रशासनिक सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में पुलिस ने सात महिलाओं को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी इल्हाम उर्र रहमान शम्सी की पत्नियां, साली, सास और अन्य परिचित शामिल हैं।
यह पूरा मामला सरकारी फंड के दुरुपयोग से जुड़ा है। आरोपी ने फर्जी लाभार्थी आईडी बनाकर सरकारी पैसे को अपने और रिश्तेदारों के खातों में ट्रांसफर किया। पुलिस के मुताबिक, यह घोटाला लंबे समय तक बिना किसी रोक-टोक के चलता रहा।
मामले की जानकारी देते हुए एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को केस दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि इल्हाम, जो एक चपरासी था, डीआईओएस कार्यालय में वेतन बिल और टोकन जनरेशन का काम देखता था। उसने इसी सिस्टम का फायदा उठाया। 12 सितंबर 2024 से फरवरी 2026 के बीच उसने 98 ट्रांजेक्शन किए। इन ट्रांजेक्शन के जरिए करीब 1.01 करोड़ रुपये अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर किए गए। बाद में यह रकम कई अन्य खातों में भी भेजी गई।
53 खातों में संदिग्ध लेनदेन
जांच के दौरान पुलिस को 53 बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन मिला। इन खातों में करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये की रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस रकम को फ्रीज करा दिया। पुलिस का कहना है कि अभी जांच जारी है। और भी खाते सामने आ सकते हैं। ऐसे में घोटाले की रकम और बढ़ने की संभावना है।
दो पत्नियों के खातों में सबसे ज्यादा पैसा, रिश्तेदार भी शामिल
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने सबसे ज्यादा पैसा अपनी दो पत्नियों के खातों में ट्रांसफर किया। लुबना के खाते में करीब 2.37 करोड़ और अजारा खान के खाते में 2.12 करोड़ रुपये भेजे गए। इसके अलावा फातिमा के खाते में 1.03 करोड़, आफिया के खाते में 80 लाख, परवीन खातून के खाते में 48 लाख, नाहिद के खाते में 95 लाख और आशकारा परवीन के खाते में 38 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए। इन सभी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। एक पत्नी अर्शी खातून को पहले ही जेल भेजा जा चुका है।
रियल एस्टेट में भी लगाया पैसा
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने घोटाले की रकम को रियल एस्टेट में भी लगाया। उसने बरेली की एक कंपनी के खाते में 90 लाख रुपये ट्रांसफर किए। वहीं एक अन्य बिल्डर कंपनी के खाते में 17.18 लाख रुपये भेजे गए। पुलिस ने इन खातों को भी होल्ड करा दिया है। इसके अलावा करीब 59 लाख रुपये की एफडी भी फ्रीज की गई है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
इस पूरे घोटाले में सिर्फ एक चपरासी की भूमिका होना कई सवाल खड़े करता है। जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि डीआईओएस कार्यालय, वित्त और कोषागार के कुछ अधिकारी-कर्मचारी भी इसमें शामिल हो सकते हैं। हालांकि, अब तक किसी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। शासन स्तर पर टीम गठित की गई थी, लेकिन नतीजे सामने नहीं आए हैं। इससे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
वेतन बिल की आड़ में खेलता रहा खेल
इल्हाम शम्सी ने शिक्षकों के वेतन बिल की आड़ में यह पूरा खेल खेला। उसने अधिकारियों का भरोसा जीता और उनके पोर्टल का इस्तेमाल किया। इसके जरिए फर्जी आईडी बनाकर पैसा ट्रांसफर करता रहा। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने 50 से ज्यादा खातों का इस्तेमाल किया। यह घोटाला लंबे समय तक बिना पकड़े चलता रहा।
कार्यालय से हटाया गया
इल्हाम मूल रूप से बीसलपुर के एक इंटर कॉलेज में चपरासी था। साल 2015 में उसे डीआईओएस कार्यालय से अटैच किया गया। कंप्यूटर की जानकारी होने के कारण उसने धीरे-धीरे सिस्टम पर पकड़ बना ली। करीब तीन साल पहले उसे हटाया भी गया था। लेकिन वह फिर से कार्यालय में सक्रिय हो गया। और दोबारा अपने नेटवर्क को मजबूत कर लिया।
जांच में जुटी पुलिस
एएसपी विक्रम दहिया ने बताया कि जांच में इन सात आरोपियों के खातों में कुल आठ करोड़ 15 लाख रुपये पहुंचने का खुलासा हुआ है। इनमें से पांच करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि पहले ही फ्रीज की जा चुकी है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संदिग्ध खातों की गहन जांच कर रही है, ताकि सरकारी धन की पूरी वसूली सुनिश्चित की जा सके।
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