बलिया में मुंडन संस्कार के दौरान चार की मौत: कड़ी मशक्कत के बा द गोताखोरों ने नदी से निकाली बॉडी, गांव में पसरा मातम

बलिया जिले में रविवार की सुबह एक पारिवारिक खुशी पलभर में गहरे दुख में बदल गई। कोतवाली थाना क्षेत्र के बिचला घाट चौकी अंतर्गत शिवरामपुर घाट पर मुंडन संस्कार के दौरान चार बच्चों की गंगा नदी में डूबने से मौत हो गई। सुबह करीब आठ बजे पूरा परिवार एक पारंपरिक समारोह के लिए घाट पर जुटा था। माहौल उत्सव का था, लेकिन कुछ ही मिनटों में चीख-पुकार और अफरा-तफरी ने सब कुछ बदल दिया। घटना ने न सिर्फ एक परिवार, बल्कि पूरे गांव को गहरे सदमे में डाल दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, नंदिता (लगभग 10-12 वर्ष) स्नान के लिए नदी में उतरी थी। अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में चली गई। उसे बचाने के लिए उसकी बड़ी बहन हर्षिता (15-16 वर्ष) तुरंत पानी में कूद गई। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई। दोनों को संघर्ष करता देख पास में मौजूद अर्जुन (15 वर्ष) और अरुण (18 वर्ष) भी मदद के लिए नदी में उतर गए। दुर्भाग्यवश, चारों ही तेज धारा और गहराई का सामना नहीं कर पाए। कुछ ही देर में चारों बच्चे पानी में समा गए। यह पूरा घटनाक्रम इतना तेज था कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
परिवार और गांव पर टूटा दुख का पहाड़
मृतक बच्चियां हर्षिता और नंदिता, अजीत चौहान की बेटियां थीं। हर्षिता 10वीं की छात्रा थी और नंदिता 5वीं में पढ़ती थी। परिवार में एक छोटा भाई भी है। पिता अजीत चौहान निर्माण कार्य से जुड़े हैं। परिवार मुंडन संस्कार के लिए रिश्तेदारी में आया था। जैसे ही हादसे की खबर फैली, पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। घर में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षति कभी पूरी नहीं हो सकती।
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन सक्रिय हुआ। गोताखोरों और एनडीआरएफ टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया। काफी मशक्कत के बाद चारों बॉडी को नदी से बाहर निकाला गया। रेस्क्यू ऑपरेशन में घंटों की मेहनत लगी। पुलिस ने पंचनामा भरकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही घाट पर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद घाटों पर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट पर न तो पर्याप्त चेतावनी बोर्ड हैं और न ही लाइफगार्ड की व्यवस्था मजबूत है। बच्चों के लिए कोई विशेष सुरक्षा इंतजाम नहीं दिखता। ऐसे में धार्मिक आयोजनों के दौरान जोखिम और बढ़ जाता है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि घाटों पर बैरिकेडिंग, लाइफ जैकेट और निगरानी को अनिवार्य किया जाए।
सतर्कता ही बचाव का रास्ता
यह घटना एक गंभीर चेतावनी है। नदी या किसी भी जल स्रोत के पास बच्चों को अकेला छोड़ना खतरनाक हो सकता है। परिवारों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। प्रशासन ने भी लोगों से अपील की है कि वे स्नान के दौरान सावधानी बरतें और बच्चों पर लगातार नजर रखें।
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