UPSSSC मुख्यालय पर होम्योपैथिक फार्मासिस्टों का प्रदर्शन: परिणाम जारी करने की उठी मांग, 9 महीने से अटकी भर्ती पर फूटा गुस्सा

उत्तरप्रदेश|5 घंटे पहले
परिणाम जारी करने की उठी मांग, 9 महीने से अटकी भर्ती पर फूटा गुस्सा

उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा होम्योपैथिक फार्मासिस्ट भर्ती का अंतिम परिणाम घोषित न किए जाने से अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए करीब 200 से अधिक अभ्यर्थियों ने आयोग के मुख्यालय पहुंचकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण करने की मांग उठाई। सुबह से ही आयोग कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने परिणाम जारी करने में हो रही देरी को लेकर नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों ने कहा कि पिछले नौ महीनों से उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती संख्या 09/2024 के अंतर्गत 397 पदों पर चयन प्रक्रिया काफी पहले पूरी हो चुकी है। मुख्य परीक्षा दो फरवरी 2025 को आयोजित की गई थी। जबकि सितंबर 2025 में 2410 अभ्यर्थियों का दस्तावेज सत्यापन भी संपन्न करा लिया गया था। इसके बावजूद आयोग अब तक अंतिम परिणाम जारी नहीं कर सका है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया तकनीकी रूप से पूरी होने के बावजूद परिणाम रोके जाने से हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

हर बार मिलता है सिर्फ आश्वासन

धरने में शामिल अभ्यर्थियों ने बताया कि वे कई बार आयोग कार्यालय के चक्कर लगा चुके हैं। लेकिन हर बार उन्हें 15 दिन के भीतर परिणाम जारी करने का भरोसा देकर वापस भेज दिया जाता है। एक अभ्यर्थी ने कहा कि पिछले नौ महीनों में वह नौ बार लखनऊ आ चुके हैं। लेकिन परिणाम घोषित नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि रिजल्ट तैयार होने के बावजूद उसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उन्हें स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। वहीं दूसरे अभ्यर्थी ने भी आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दस्तावेज सत्यापन के बाद भी परिणाम लंबित रखना अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों द्वारा बार-बार एक ही आश्वासन दिया जाता है। लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रगति दिखाई नहीं देती।

मानसिक और आर्थिक दबाव झेल रहे अभ्यर्थी

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया अधूरी रहने के कारण वे मानसिक तनाव और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने बताया कि नौकरी की उम्मीद में उन्होंने अन्य अवसर भी छोड़ दिए थे। लेकिन परिणाम न आने से उनकी स्थिति असमंजस में बनी हुई है। अभ्यर्थियों ने ‘हमारी मेहनत, हमारा अधिकार’, ‘परिणाम दो, न्याय दो’ और ‘हक लेकर रहेंगे’ जैसे नारों के माध्यम से अपनी मांगों को बुलंद किया।

शांतिपूर्ण आंदोलन के जरिए न्याय की मांग

धरना दे रहे अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और उनका उद्देश्य केवल भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराना है। उन्होंने सरकार और आयोग से अपील की कि युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द अंतिम परिणाम घोषित किया जाए। फिलहाल आयोग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिलेगा। तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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