बारुईपुर रेप-हत्याकांड का मुख्य आरोपी समेत 3 अरेस्ट: रेप के बाद तालाब में जिंदा फेंका था, डूबने और ब्लीडिंग के कारण हुई मौत

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में 12 वर्षीय बालिका से रेप और हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को अरेस्ट कर लिया है। इस मामले में अब तक तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि रेप के बाद पीड़िता को जिंदा तालाब में फेंका गया था, जिससे डूबने और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हुई। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी आनंद सरदार को सोमवार को सर्च ऑपरेशन के दौरान बारुईपुर के बाजार क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया। इससे पहले मामले में दो अन्य आरोपियों को भी हिरासत में लिया जा चुका है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि 12 वर्षीय बालिका चार जुलाई को अपनी सहेली के लिए उपहार खरीदने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने गुमशुदगी का मामला दर्ज किया। अगले दिन उसका शव सूर्यपुर हाट क्षेत्र के एक तालाब से बरामद हुआ।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गंभीर तथ्य सामने आए
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता के फेफड़ों और पेट में पानी मिला है, जिससे यह संकेत मिलता है कि रेप के बाद उसे जीवित अवस्था में तालाब में फेंका गया था। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि उसके निजी अंगों पर चोट के निशान, शरीर पर खरोंच और काटने के निशान मिले हैं। सिर पर गंभीर चोट भी पाई गई, जो किसी भारी वस्तु से वार या कठोर सतह पर पटकने के कारण हो सकती है। जांच के अनुसार अत्यधिक रक्तस्राव और डूबने से उसकी मौत हुई।
सीसीटीवी और हिंसा दोनों जांच के दायरे में
पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले हैं। फुटेज में बालिका चार लोगों के साथ जाती दिखाई दे रही है। पुलिस इन सभी की पहचान और भूमिका की पुष्टि में जुटी है। घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने इंद्रजीत तांती नामक व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी, जिस पर अपराध में शामिल होने का संदेह जताया गया था। पुलिस इस हिंसा की भी अलग से जांच कर रही है।
मामले पर सियासी बयानबाजी और एनसीडब्ल्यू की कार्रवाई
घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पीड़ित परिवार से मिलने से रोकने के लिए उनके आवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। वहीं भाजपा ने इसे नियमित सुरक्षा व्यवस्था बताया है। इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक सिद्धार्थ नाथ गुप्ता से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) मांगी है। आयोग ने कहा है कि रिपोर्ट में दुष्कर्म और हत्या की जांच के साथ-साथ घटना के बाद हुई भीड़ की हिंसा, केंद्रीय बलों पर हमले और पुलिस वाहनों में आगजनी की घटनाओं का भी पूरा विवरण शामिल किया जाए।
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