नकली दवाओं को लेकर सरकार सतर्क: दवाओं पर बारकोड लगाना अनिवार्य, पहले 300 दवा ब्रांडस पर लागू था नियम

भारत सरकार ने नकली और घटिया दवाओं के कारोबार पर नकेल कसने के लिए दवाओं पर ट्रैक-एंड-ट्रेस क्यूआर कोड प्रणाली लागू की है। इस डिजिटल व्यवस्था के तहत दवाओं की पैकेजिंग (पत्ते या शीशी) पर एक यूनिक क्यूआर कोड या बारकोड छापना अनिवार्य किया गया है। जब कोई उपभोक्ता या केमिस्ट इसे स्मार्टफोन से स्कैन करेगा तो केंद्रीय डेटाबेस से दवा की प्रामाणिकता की रियल-टाइम जांच हो जायेगी।
अब नकली और घटिया दवाओं के जानलेवा जाल को तोड़ने के लिए सरकार ने वैक्सीन, एंटी-कैंसर, एंटीमाइक्रोबियल्स और नारकोटिक्स दवाओं पर क्यूआर कोड या बारकोड लगाना अनिवार्य कर दिया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 'औषधि नियम, 1945' में संशोधन कर इन दवाओं को 'शेड्यूल एच2' में शामिल किया है। पहले यह नियम देश के सिर्फ शीर्ष 300 दवा ब्रांड्स पर लागू था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर गंभीर बीमारियों की दवाओं तक कर दिया गया है।
स्कैन करते ही खुलेगी दवा की कुंडली
इस नई 'ट्रैक-एंड-ट्रेस' व्यवस्था के तहत निर्माताओं को दवा की प्राथमिक पैकेजिंग (जैसे स्ट्रिप या शीशी) या जगह कम होने पर सेकेंडरी पैकेजिंग पर क्यूआर कोड छापना होगा। इस कोड को स्कैन करते ही सॉफ्टवेयर के जरिये दवा की पूरी कुंडली सामने आ जाएगी।
मरीजों की जिंदगी के साथ नहीं होगा खिलवाड़
कोड को स्कैन करते ही दवा का यूनिक कोड, ब्रांड का नाम, निर्माता का पता, बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जैसी बेहद जरूरी जानकारियां डिजिटल रूप में दर्ज होंगी। इससे पूरी सप्लाई चेन में दवा के असली होने की जांच आसानी से हो सकेगी, जिससे मरीजों की जिंदगी के साथ होने वाला खिलवाड़ रुक जायेगा।
भारत की वैश्विक समस्या में मदद
यह कदम न केवल नकली दवाओं की पहचान करेगा, बल्कि एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (एएमआर) यानी दवाओं के बेअसर होने की गंभीर वैश्विक समस्या से लड़ने में भी भारत की मदद करेगा। सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए दवा कंपनियों को पर्याप्त समय दिया है।
मरीजों की सुरक्षा कवच बनेगी सरकार की पहल
वैक्सीन, एंटी-कैंसर और नारकोटिक्स दवाओं के लिए यह नियम एक जुलाई, 2026 से प्रभावी हो जाएगा, जबकि एंटीमाइक्रोबियल्स दवाओं के लिए कंपनियों को एक जुलाई, 2028 तक का समय दिया गया है। सरकार की यह पहल करोड़ों मरीजों के विश्वास और उनकी सेहत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच बनेगी।
नकली दवाओं पर कैसे लगेगी रोक?
सिंगल-यूज़ कोडिंग: इस सिस्टम में हर एक पत्ते को एक यूनिक डिजिटल पहचान मिलती है। यदि कोई जालसाज असली खाली डिब्बे या रैपर में नकली दवा भरकर उसी कोड को दोबारा बाजार में बेचेगा, तो स्कैन करने पर सिस्टम तुरंत चेतावनी देगा कि यह कोड पहले ही उपयोग किया जा चुका है।
सप्लाई चेन ट्रैकिंग: मैन्युफैक्चरिंग प्लांट से लेकर रिटेल स्टोर तक दवा के पूरे सफर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन और कंपनियां ट्रैक कर सकती हैं।
API पर भी शिकंजा: दवाओं को बनाने वाले कच्चे माल यानी एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स पर भी क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य किया गया है ताकि शुरुआत से ही शुद्धता बनी रहे।
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