पहलगाम हमले में हाफिज सईद पर कसा शिकंजा: स्पेशल कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, चार्जशीट के बाद हुई कार्रवाई

4 घंटे पहले
स्पेशल कोर्ट ने जारी किया गैर-जमानती वारंट, चार्जशीट के बाद हुई कार्रवाई

पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। जम्मू की विशेष अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ आवश्यक है। इससे पहले राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी पूरक चार्जशीट में हाफिज सईद को हमले की साजिश रचने और भारत के खिलाफ युद्ध जैसी गतिविधियों का मुख्य आरोपी बताया था।

विशेष अदालत ने आठ जुलाई को गैर-जमानती वारंट जारी किया था। इसकी जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक हुई। इससे पहले छह जुलाई को एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले से संबंधित पूरक चार्जशीट दाखिल की थी। एजेंसी के अनुसार, बैसरन घाटी में हुए हमले की पूरी साजिश लश्कर प्रमुख हाफिज सईद ने तैयार की थी। चार्जशीट में उस पर भारत के खिलाफ जंग छेड़ने और आतंकी कार्रवाई का संचालन करने का आरोप लगाया गया है। 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर हमला किया था। इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने छह और सात मई की रात 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। भारत का दावा है कि इस अभियान में 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे।

जांच में सामने आए अहम तथ्य

एनआईए ने इस मामले में पहली चार्जशीट 15 दिसंबर 2025 को दाखिल की थी। उसमें पाकिस्तान स्थित आतंकी हैंडलर साजिद जट समेत छह आतंकियों को आरोपी बनाया गया था। उस समय हाफिज सईद का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं था। जांच के दौरान पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकी मारे जा चुके हैं। वहीं, उनके हैंडलर सैफुल्लाह जट्ट उर्फ साजिद लंगड़ा अब भी फरार है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है।

चार्जशीट में कई बड़े खुलासे

एनआईए की जांच में सामने आया कि सैफुल्लाह जट्ट पाकिस्तान के लाहौर से आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दे रहा था और उसी ने बैसरन घाटी की लोकेशन भेजी थी। एजेंसी के अनुसार, दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों ने हमले से पहले आतंकियों को देखा था। लेकिन इसकी सूचना सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। दोनों को अरेस्ट किया जा चुका है।

कराची रूट से पाकिस्तान पहुंचे मोबाइल

जांच में यह भी सामने आया कि हमले से एक दिन पहले आतंकियों ने एक गाइड की झोपड़ी में भोजन किया था और वारदात से पहले बैसरन घाटी में पेड़ के नीचे खाना खाने के बाद धार्मिक नारे लगाते हुए फायरिंग शुरू की थी। एनआईए के मुताबिक, हमले में इस्तेमाल किया गया एक्शन कैमरा अमेरिका में निर्मित था, जो चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा। वहीं मारे गए आतंकियों से बरामद मोबाइल फोन कराची की सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचे थे। इनमें बैसरन घाटी की लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं, जिन्हें जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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