ओडिशा में रथयात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब: दो श्रद्धालुओं की मौत, बारिश के बाद अचानक बढ़ी भीड़

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथयात्रा लगातार बारिश के बीच आस्था और उत्साह के साथ निकली। करीब 10 लाख श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि दोनों मौतें भगदड़ या भीड़ प्रबंधन की किसी विफलता के कारण नहीं हुईं। वहीं, रथ निर्धारित दूरी तय करने के बाद रोक दिए गए और आज सुबह पूजा-भोग के पश्चात यात्रा दोबारा शुरू होगी।
पुरी में सुबह से ही लगातार बारिश होती रही। इसके बावजूद धार्मिक अनुष्ठान तय कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुए। शाम करीब पांच बजे जैसे ही भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के रथ आगे बढ़े, श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। लगभग एक घंटे बाद बारिश थमते ही होटल, धर्मशाला और लॉज में रुके श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में रथ मार्ग पर पहुंच गए। अचानक बढ़ी भीड़ के कारण रथों के आसपास दबाव बढ़ गया और कई स्थानों पर धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई। भीड़ का घनत्व इतना अधिक हो गया कि कई श्रद्धालुओं को सांस लेने में भी परेशानी हुई और लोग एक-दूसरे पर गिरते नजर आए।
सरकार बोली- मौत का कारण भगदड़ नहीं
मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) के अनुसार, रथयात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ने पर सात श्रद्धालुओं को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें करीब 60 वर्षीय एक श्रद्धालु की मौत हो गई। वहीं, उनकी मौत का सटीक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। वहीं, 35 वर्ष से अधिक उम्र के दूसरे श्रद्धालु की हार्ट अटैक से जान गई। राज्य सरकार ने कहा कि दोनों मौतों का संबंध भगदड़ या भीड़ प्रबंधन में किसी कमी से नहीं है। प्रशासन के मुताबिक इस वर्ष रथयात्रा में लगभग 10 लाख श्रद्धालु शामिल हुए।
भीड़ प्रबंधन में चार प्रमुख कमियां आईं सामने
बारिश थमने के बाद भीड़ का दबाव बढ़ने के बावजूद मंदिर के सिंहद्वार से रथों की ओर श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रभावी ढंग से नहीं रोका गया। भीड़ बढ़ने पर लोगों को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ने या प्रवेश नियंत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं दिखाई दी। अलग-अलग दिशाओं से लोगों की आवाजाही जारी रहने के कारण रथ मार्ग पर क्रॉस मूवमेंट बढ़ गया। वहीं, कई स्थानों पर लगाई गई बैरिकेडिंग भीड़ नियंत्रित करने के बजाय संकरे मार्ग का कारण बन गई, जिससे दबाव और बढ़ गया। देर शाम तक भगवान जगन्नाथ का रथ करीब 200 मीटर, भगवान बलभद्र का रथ 500 मीटर और देवी सुभद्रा का रथ लगभग 700 मीटर आगे बढ़ने के बाद रोक दिया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार आज सुबह पूजा-भोग के बाद रथयात्रा फिर शुरू होगी।
साल में एक बार मौसी के घर पहुंचते हैं भगवान जगन्नाथ
धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुंडिचा मंदिर भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। वर्ष में केवल एक बार रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा यहां पहुंचते हैं और सात दिनों तक विराजमान रहते हैं। इसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से तीनों देवता वापस श्री जगन्नाथ मंदिर लौटते हैं। मान्यता है कि राजा इंद्रद्युम्न ने जगन्नाथ मंदिर का निर्माण कराया था और उनकी पत्नी रानी गुंडिचा के नाम पर इस मंदिर का नाम पड़ा। रथयात्रा से पहले मंदिर की विशेष सफाई 'गुंडिचा मार्जन' के रूप में की जाती है। वहीं, वापसी यात्रा के दौरान मौसी मां मंदिर में भगवान को पारंपरिक 'पोडा पीठा' का भोग अर्पित किया जाता है।
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